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मापनी को निर्धारित करने की विभिन्न विधियाँ कौन-कौन सी हैं? - Geography (भूगोल)

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प्रश्न

मापनी को निर्धारित करने की विभिन्न विधियाँ कौन-कौन सी हैं?

थोडक्यात उत्तर

उत्तर

  • फोटो की मापनी की गणना के लिए तीन विधियाँ प्रयोग में लाई जाती हैं, जो विभिन्न सूचनाओं पर आधारित होती हैं।
  1. प्रथम विधि – फोटो एवं धरातलीय दूरी के बीच संबंध स्थापित करना : यदि वायव फोटो में कोई अतिरिक्त जानकारी उपलब्ध है, जैसे-धरातल पर दो। पहचानने योग्य बिन्दुओं की दूरी, तो एक ऊर्ध्वाधर फोटो की मापनी सरलतापूर्वक प्राप्त की जा सकती है। यदि वायव फोटो पर मापी गई दूरी Dp के साथ धरातल Dg की संगत दूरी ज्ञात हो, तो वायव फोटो की मापनी को इन दोनों के अनुपात यानी Dp Dg में मापा जाएगा।
  2. द्वितीय विधि – फोटो दूरी एवं मानचित्र दूरी में संबंध स्थापित करना : धरातल पर विभिन्न बिंदुओं के बीच की दूरी हमेशा ज्ञात नहीं होती है। किन्तु अगर एक वायव फोटो पर दिखाए गए क्षेत्र का मानचित्र उपलब्ध हो, तो इसका उपयोग फोटो मापनी को ज्ञात करने में किया जा सकता है।
  3. तृतीय विधि – फोकस दूरी एवं वायुयान की उड़ान ऊँचाई के बीच संबंध स्थापित करना : यदि मानचित्र एवं फोटोग्राफ की सापेक्ष दूरियों की कोई भी अतिरिक्त जानकारी उपलब्ध नहीं हो, लेकिन कैमरे की फोकस दूरी तथा वायुयान की उड़ान-ऊँचाई के संबंध में जानकारी हो तो फोटो मापनी प्राप्त की जा सकती है। यदि दिया गया वायव फोटो पूर्ण अथवा आंशिक रूप से ऊर्ध्वाधर हो तथा चित्रित भू-भाग समतल हो तो प्राप्त फोटो मापनी की शुद्धता अधिक होगी। अधिकतर उर्ध्वाधर फोटो में कैमरे की फोकस दूरी f तथा वायुयान की उड़ान-ऊँचाई H को सीमांत जानकारी के रूप में लिया जाता है।
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वायव फ़ोटो के प्रकार
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पाठ 6: वायव फ़ोटो का परिचय - अभ्यास [पृष्ठ ७९]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Practical Work in Geography [Hindi] Class 11
पाठ 6 वायव फ़ोटो का परिचय
अभ्यास | Q 3. (ख) | पृष्ठ ७९
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