Advertisements
Advertisements
प्रश्न
‘मनुष्यता’ कविता में कवि ने मनुष्य के किस कृत्य को अनर्थ कहा है और क्यों ?
उत्तर
‘मनुष्यता’ कविता में कवि ने मनुष्य को यह बताने का प्रयास किया है कि सभी मनुष्य आपस में ई ई हैं। इस सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि सबको जन्म देने वाला ईश्वर एक है। पुराणों में भी इस बात के प्रमाण हैं कि सृष्टि का रचनाकार वही एक है। वह सारे जगत का अजन्मा पिता है। फिर मनुष्य-मनुष्य में थोड़ा-बहुत जो भेद है। वह उसके अपने कर्मों के कारण है परंतु एक ही ईश्वर या आत्मा का अंश उनमें समाए होने के कारण सभी एक हैं। इतना जानने के बाद भी कोई मनुष्य दूसरे मनुष्य की अर्थात् अपने भाई की मदद न करे और उसकी व्यथा दूर न करे तो वह सबसे बड़े अनर्थ हैं। इसका कारण यह है कि ऐसा न करके मनुष्य अपनी मनुष्यता को कलंकित करता है।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
कवि ने दधीचि कर्ण, आदि महान व्यक्तियों का उदाहरण देकर मनुष्यता के लिए क्या संदेश दिया है?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
कवि ने किन पंक्तियों में यह व्यक्त किया है कि हमें गर्व-रहित जीवन व्यतीत करना चाहिए?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
व्यक्ति को किस प्रकार का जीवन व्यतीत करना चाहिए? इस कविता के आधार पर लिखिए।
अपने अध्यापक की सहायता से रंतिदेव, दधीचि, कर्ण आदि पौराणिक पात्रों के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए।
भवानी प्रसाद मिश्र की ‘प्राणी वही प्राणी है’ कविता पढ़िए तथा दोनों कविताओं के भावों में व्यक्त हुई समानता को लिखिए।
कवि किसके जीने और मरने को एक समान बताता है?
मनुष्य किसी अन्य को अनाथ समझने की भूल कब कर बैठता है?
हमें किसी को अनाथ क्यों नहीं समझना चाहिए?
अपने लिए जीने वाला कभी मरता नहीं’ कवि ने ऐसा क्यों कहा है?
कवि ने सफलता पाने के लिए मनुष्य को किस तरह प्रयास करने के लिए कहा है?
‘रहो न यों कि एक से न काम और का सरे’ के माध्यम से कवि क्या सीख देना चाहता है?
‘मनुष्यता’ कविता की वर्तमान में प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिए।
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए-
चलो अमीष्ट मार्ग में सहर्ष खेलते हुए, |
- कवि सभी को एक होकर चलने की प्रेरणा देते हैं। इससे ज्ञात होता है कि कवि ______ के पक्षघर हैं।
(क) निरन्वय
(ख) समन्वय
(ग) क्रमान्वय
(घ) दूरान्वय - अभीष्ट मार्ग से तात्पर्य है-
(क) स्वर्गगत मार्ग
(ख) प्रमाणित मार्ग
(ग) क्रीड़ाक्षेत्रीय मार्ग
(घ) मनोवांछित मार्ग - समर्थ भाव है, दूसरों को
(क) सफल करते हुए स्वयं सफल होना
(ख) ज्ञान मार्ग बताते हुए सफल बनाना
(ग) शक्ति प्रदर्शन द्वारा सफलता दिलाना
(घ) सफल करते हुए अपना स्वार्थ सिद्ध करना - 'भिन्नता ना बढ़े' का आशय है-
(क) मत भिन्नता हो
(ख) मतभेद कम हों
(ग) भेदभाव भिन्न हों
(घ) मतभेद अधिक हों - निम्नलिखित वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़िए-
- हमें मृत्यु से कभी नहीं डरना चाहिए ।
- बाहय आडंबरों का विरोध करना चाहिए।
- मार्ग की विपत्तियों को ढकेलते हुए आगे बढ़ना चाहिए।
- प्राकृतिक सौंदर्य के लिए ईश्वर को धन्यवाद देना चाहिए।
- हमें अपने जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
पदयांश से मेल खाते वाक्यों के लिए उचित विकल्प चुनिए -
(क) (i), (ii), (v)
(ख) (i), (iii), (v)
(ग) (ii), (iii), (iv)
(घ) (ii), (iv), (v)
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए और उपयुक्त कथन चुनिए।
पद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए -
“घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्नता कभी” - 'मनुष्यता' कविता से ली गई इस पंक्ति के माध्यम से कवि ने जीवन रूपी मार्ग पर आगे बढ़ते समय क्या याद रखने को कहा है और क्यों?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए:
'मनुष्यता' कविता में कवि ने कैसे जीवन को व्यर्थ बताया है, और क्यों?