मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएचएससी वाणिज्य (इंग्रजी माध्यम) इयत्ता १२ वी

मन, वाणी और कर्म का सामंजस्य ही मनुष्य को श्रेष्ठता के पद पर पहुँचाता है। फिर भी वचनों का विशेष महत्त्व है, क्योंकि एक कटु वचन सारे किए-धरे पर पानी फेर सकता है। - Hindi

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

अपठित गद्यांश पढ़कर कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

मन, वाणी और कर्म का सामंजस्य ही मनुष्य को श्रेष्ठता के पद पर पहुँचाता है। फिर भी वचनों का विशेष महत्त्व है, क्योंकि एक कटु वचन सारे किए-धरे पर पानी फेर सकता है। वाणी की मधुरता के साथ नियमपूर्ण व्यवहार की भी आवश्यकता है। विनयपूर्ण व्यवहार ही शिष्टाचार है। शिष्टाचार का अर्थ लोग दिखावा या तकल्लुफ करते हैं। लेकिन वास्तव में उसका अर्थ है - सज्जनोचित व्यवहार। मधुर भाषण के साथ इसका भी मूल्य है। इनके द्वारा मनुष्य की शिक्षा-दीक्षा और कुल की परंपरा और मर्यादा का परिचय मिलता है।

  1. उत्तर लिखिए:     (२)
    1. मन, वाणी और कर्म का सामंजस्य −
    2. शिष्टाचार का वास्तव में अर्थ −
  2.  
    1. शब्द युग्म पहचान कर लिखिए:    (१)
      1. ______
      2. ______
    2. विलोम शब्द लिखिए:     (१)
      1. कल्पना × ______
      2. अमूल्य × ______
  3. ‘जीवन में सदाचार का महत्त्व’ इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए।      (२)
आकलन

उत्तर


    1. मन, वाणी और कर्म का सामंजस्य − मनुष्य को श्रेष्ठता के पद पर पहुँचाता है।
    2. शिष्टाचार का वास्तव में अर्थ − सज्जनोचित व्यवहार है।
  1.  

      1. कर्म - धर्म
      2. अमूल्य - मूल्य

      1. कल्पना × वास्तव
      2. अमूल्य × मूल्य
  2. सदाचार का हमारे जीवन में विशेष महत्त्व है, क्योंकि यह व्यक्ति के आचरण, संस्कार और व्यवहार को श्रेष्ठ बनाता है। सदाचार से समाज में सम्मान प्राप्त होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है। मधुर वाणी, ईमानदारी, सत्य और शिष्टाचार के गुण मनुष्य को सफलता की ओर ले जाते हैं। अच्छे आचरण से न केवल व्यक्ति का बल्कि संपूर्ण समाज का विकास होता है। इसलिए हमें सदैव सदाचार के मार्ग पर चलना चाहिए। 
shaalaa.com
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
2023-2024 (July) Official
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×