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‘मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ’ किसका प्रतीक हैं? ये किसका बोध करा रही हैं? - Hindi Course - A

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प्रश्न

‘मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ’ किसका प्रतीक हैं? ये किसका बोध करा रही हैं?

टीपा लिहा

उत्तर

‘मुरझाकर गिरने वाली पत्तियाँ’ मानव जीवन में आए दुख और निराशाओं की प्रतीक हैं। कवि के जीवन में आए दुख वृक्ष की पत्तियों के समान गिरकर, एक-एक कर क्रमशः याद आ रहे हैं। इससे कवि को जीवन की नश्वरता का बोध भी हो रही है।

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आत्मकथ्य
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 4: जयशंकर प्रसाद - आत्मकथ्य - अतिरिक्त प्रश्न

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi - Kshitij Part 2 Class 10
पाठ 4 जयशंकर प्रसाद - आत्मकथ्य
अतिरिक्त प्रश्न | Q 1

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