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निबंध लिखिए: वृक्षारोपण -

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प्रश्न

निबंध लिखिए:

वृक्षारोपण

दीर्घउत्तर

उत्तर

वृक्षारोपण

प्राचीन काल से ही मानव और प्रकृति का घनिष्ठ सम्बन्ध रहा है। भोजन, वस्त्र और आवास की समस्याओं का समाधान भी इन्हीं वनों से हुआ है। वृक्षों से उसने मीठे फल, वृक्षों की छाल प्राप्त की और पत्तों से उसने अपना शरीर ढका। प्रकृति का सर्वश्रेष्ठ उपहार वन है। भारत की सभ्यता वनों की गोद मे ही विकासमान हुई है। हमारे यहाँ के ऋषि मुनियों ने इन वृक्ष की छाँव में बैठकर ही चिंतन मनन के साथ ही ज्ञान के भंडार को मानव को सौपा है। वैदिक ज्ञान के वैराग्य में, आरण्यक ग्रंथों का विशेष स्थान है वनों की ही गोद में गुरुकुल की स्थापना की गई थी। इन गुरुकुलो में अर्थशास्त्री, दार्शनिक तथा राष्ट्र निर्माण शिक्षा ग्रहण करते थे इन्ही वनों से आचार्य तथा ऋषि मानव के हितों के अनेक तरह की खोजें करते थे ओर यह क्रम चला ही आ रहा है। पक्षियों का चहकना, फूलो का खिलना किसके मन को नहीं भाता है इसलिए वृक्षारोपण हमारी संस्कृती में समाहित है।

हमारे भारत देश में जहां वृक्षारोपण का कार्य होता है वही इन्हें पूजा भी जाता है। कई ऐसे वृक्ष है, जिन्हें हमारे हिंदू धर्म में ईश्वर का निवास स्थान माना जाता है, जैसे नीमका पेड़, पीपल का पेड़, आंवला, बरगद आदी को शास्त्रों के अनुसार पूजनीय कहलाते है और साथ ही धर्म शास्त्रों में सभी तरह से वृक्ष प्रकृति के सभी तत्वों की विवेचना करते हैं। गीता में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं।

” मूलतः ब्रह्मा रूपाय मध्यतो विष्णु रुपिनः
अग्रतः शिव रूपाय अश्वव्याय नमो नमः.”

अर्थात इसके मूल रूप में ब्रह्मा मध्य में विष्णु ओर अग्र भाग में शिव का वास होता है, इसी कारण अश्व्यय नामधारी वृक्ष को नमन किया जाता है।

आज मानव अपनी भौतिक प्रगति की तरफ आतूर है। वह अपने स्वार्थ को पूरा करने के लिए बेधड़क वृक्षों की कटाई कर रहा है। औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और जनसंख्या के चलते बनो का क्षेत्रफल प्रतिदिन घटता जा रहा है। एक अनुमान के अनुसार एक करोड़ हेक्टेयर इलाके के वन काटे जाते हैं, अकेले भारत में ही 10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फैले बनो को काटा जा रहा है। अगर इसी तरह से वृक्ष की कटाई होती रही तो इसके अस्तित्व पर ही एक प्रश्न चिन्ह लग जाएगा। अत: वृक्षारोपण से हम पुन: इस समस्या का निदान कर सकते हैं। सरकार और जनता इस दिशा में प्रयासरत है। इसे और बड़े स्तर पर लागू करना होगा ताकि मानव विकास और पर्यावरण की रक्षा साथ-साथ चलती रहे।

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