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प्रश्न
नीचे दिए गए चित्र में निहारिका से निर्मित तारों के स्वरूप दर्शाए गए है। उनके बारे में चर्चा करो।
उत्तर
इस चित्र में निहारिका से तारों के विकास की प्रक्रिया को दर्शाया गया है। यह प्रक्रिया इस प्रकार है:
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निहारिका: तारों की उत्पत्ति निहारिका से होती है। यह गैस और धूल का विशाल बादल होता है।
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सामान्य तारा: यदि निहारिका का द्रव्यमान कम होता है, तो इससे एक सामान्य तारा बनता है।
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लाल दानव तारा: सामान्य तारा समय के साथ फैलकर लाल दानव तारा बन जाता है।
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बिंबाशेष: लाल दानव तारे का बाहरी भाग फैलकर एक बिंबाशेष बनाता है।
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श्वेत वामन: अंततः तारा सिकुड़कर एक छोटा और घना तारा बन जाता है जिसे श्वेत वामन कहते हैं।
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भव्य तारा: यदि निहारिका का द्रव्यमान बहुत अधिक होता है तो वह एक भव्य तारे में बदलती है।
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लाल महादानव तारा: भव्य तारा समय के साथ एक लाल महादानव तारा बनता है।
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अति दीप्त तारा: यह तारा विस्फोट करता है जिसे अति दीप्त तारा कहते हैं।
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न्यूट्रॉन तारा या कृष्णगुरु: अति दीप्त तारे के बाद जो बचता है वह या तो न्यूट्रॉन तारा होता है या फिर एक कृष्णगुरु।