मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (हिंदी माध्यम) इयत्ता १० वी

निम्न मुद्दों के आधार पर पद्‌य विश्लेषण कीजिए : १. रचनाकार का नाम २. रचना की विधा ३. पसंदीदा पंक्‍ति ४. पसंद होने का कारण ५. रचना से प्राप्त संदेश/प्रेरणा - Hindi [हिंदी]

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर "चिंता" कविता का पद्य विश्लेषण कीजिए:

  1. रचनाकार का नाम
  2. रचना की विधा
  3. पसंदीदा पंक्‍ति
  4. पसंद होने का कारण
  5. रचना से प्राप्त संदेश/प्रेरणा
थोडक्यात उत्तर

उत्तर

१. रचनाकार का नाम : जयशंकर प्रसाद 

२. रचना की विधा : महाकाव्य अंश

३. पसंदीदा पंक्‍ति :  

‘प्रकृति रही दुर्जेय, पराजित हम सब थे भूले मद में,
भोले थे, हॉं तिरते केवल सब विलासिता के नद में।
वे सब डूबे, डूबा उनका विभव, बन गया पारावर
उमड़ रहा था देव सुखों पर दुख जलधि का नाद अपार ।’

४. पसंद होने का कारण : हमें ये पंक्तियाँ इसलिए पसंद हैं क्योंकि इन पंक्तियों से हमें यह सीख मिलती है कि ‘अति सर्वत्र वर्जयेत’ अर्थात किसी भी चीज की अति ठीक नहीं होती। यदि देवताओं ने विलासितपूर्ण जीवन जीने में अति न की होती, तो उनकी यह दशा न होती। उनके इसी आचरण का यह परिणाम हुआ कि देवता भी डूब गए, सुख के उपकरण भी डूब गए।

५. रचना से प्राप्त संदेश/प्रेरणा : इस पद्यांश से हमें यह संदेश/प्रेरणा मिलती है कि हमें अति से बचना चाहिए। जीवन के किसी भी क्षेत्र में अति ठीक नहीं होती।

shaalaa.com
चिंता
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 2.09: चिंता - स्‍वाध्याय [पृष्ठ १०२]

APPEARS IN

बालभारती Hindi - Kumarbharati 10 Standard SSC Maharashtra State Board
पाठ 2.09 चिंता
स्‍वाध्याय | Q (७) | पृष्ठ १०२

संबंधित प्रश्‍न

संजाल पूर्ण कीजिए : 

 


लिखिए : 

 


लिखिए : 

 


जोड़ियाँ मिलाइए :

उत्तर
जलधि ______ दुख
पुतले ______ उपेक्षाएँ
रेखाएँ ______ नाद
यौवन ______ चमकीले

कविता (चिंता) में इन अर्थ में आए शब्‍द ढूँढ़िए : 

वर्षा - ______ 


कविता (चिंता) में इन अर्थ में आए शब्‍द ढूँढ़िए : 

अत्‍यंत गुप्त - ______ 


कविता (चिंता) में इन अर्थ में आए शब्‍द ढूँढ़िए : 

पृथ्‍वी/नदी - ______ 


कविता (चिंता) में इन अर्थ में आए शब्‍द ढूँढ़िए : 

वायु - ______ 


कविता (चिंता) की अंतिम चार पंक्तियों का भावार्थ लिखिए।

प्रकृति रही दुर्जेय, पराजित हम सब थे भूले मद में,
भोले थे, हॉं तिरते केवल सब विलासिता के नद में।
वे सब डूबे, डूबा उनका विभव, बन गया पारावर
उमड़ रहा था देव सुखों पर दुख जलधि का नाद अपार’’


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×