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प्रश्न
निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर "चिंता" कविता का पद्य विश्लेषण कीजिए:
- रचनाकार का नाम
- रचना की विधा
- पसंदीदा पंक्ति
- पसंद होने का कारण
- रचना से प्राप्त संदेश/प्रेरणा
उत्तर
१. रचनाकार का नाम : जयशंकर प्रसाद
२. रचना की विधा : महाकाव्य अंश
३. पसंदीदा पंक्ति :
‘प्रकृति रही दुर्जेय, पराजित हम सब थे भूले मद में,
भोले थे, हॉं तिरते केवल सब विलासिता के नद में।
वे सब डूबे, डूबा उनका विभव, बन गया पारावर
उमड़ रहा था देव सुखों पर दुख जलधि का नाद अपार ।’
४. पसंद होने का कारण : हमें ये पंक्तियाँ इसलिए पसंद हैं क्योंकि इन पंक्तियों से हमें यह सीख मिलती है कि ‘अति सर्वत्र वर्जयेत’ अर्थात किसी भी चीज की अति ठीक नहीं होती। यदि देवताओं ने विलासितपूर्ण जीवन जीने में अति न की होती, तो उनकी यह दशा न होती। उनके इसी आचरण का यह परिणाम हुआ कि देवता भी डूब गए, सुख के उपकरण भी डूब गए।
५. रचना से प्राप्त संदेश/प्रेरणा : इस पद्यांश से हमें यह संदेश/प्रेरणा मिलती है कि हमें अति से बचना चाहिए। जीवन के किसी भी क्षेत्र में अति ठीक नहीं होती।
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संजाल पूर्ण कीजिए :
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जोड़ियाँ मिलाइए :
अ | उत्तर | आ |
जलधि | ______ | दुख |
पुतले | ______ | उपेक्षाएँ |
रेखाएँ | ______ | नाद |
यौवन | ______ | चमकीले |
कविता (चिंता) में इन अर्थ में आए शब्द ढूँढ़िए :
वर्षा - ______
कविता (चिंता) में इन अर्थ में आए शब्द ढूँढ़िए :
अत्यंत गुप्त - ______
कविता (चिंता) में इन अर्थ में आए शब्द ढूँढ़िए :
पृथ्वी/नदी - ______
कविता (चिंता) में इन अर्थ में आए शब्द ढूँढ़िए :
वायु - ______
कविता (चिंता) की अंतिम चार पंक्तियों का भावार्थ लिखिए।
प्रकृति रही दुर्जेय, पराजित हम सब थे भूले मद में,
भोले थे, हॉं तिरते केवल सब विलासिता के नद में।
वे सब डूबे, डूबा उनका विभव, बन गया पारावर
उमड़ रहा था देव सुखों पर दुख जलधि का नाद अपार’’