मराठी

निम्न पर लघु टिप्पणी लिखें - जनजातीय आंदोलन - Sociology (समाजशास्त्र)

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

निम्न पर लघु टिप्पणी लिखें - 

जनजातीय आंदोलन

थोडक्यात उत्तर

उत्तर

  • जनजातीय आंदोलन - अधिकांश जनजातीय आंदोलन मध्य भारत के तथाकथित “जनजातीय बेल्ट" में स्थित रहे हैं। जैसे संथाल, ओरांव तथा मुंडा जो कि छोटानागपुर तथा संथाल परगना में स्थित हैं। झारखंड के सामाजिक आंदोलनों के करिश्माई नेता बिरसा मुंडा थे, जो एक आदिवासी थे तथा जिन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध एक बड़े विद्रोह का नेतृत्व किया। उनकी स्मृतियाँ अभी भी जीवित हैं तथा भावी पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। जनजातीयों में एक शिक्षित मध्यम वर्ग प्रदान करने का श्रेय ईसाई मिशनरियों को जाता है। इस शिक्षित वर्ग ने अपनी जातिगत जागरूकता, अपनी पहचान, संस्कृति तथा परापराओं को विकसित किया। दक्षिण बिहार के आदिवासियों को अलग-अलग कर दिए जाने का बोध हुआ। उन्होंने अपने सामान्य प्रतिद्वंद्वी-दिकू, प्रवासी व्यापारियों तथा महाजनों को माना। सरकारी पदों पर विराजमान आदिवासियों ने एक बौद्धिक नेतृत्व का विकास किया तथा पृथक राज्य के निर्माण में चलाए जा रहे आंदोलनों को गति प्रदान किया। झांरखंड के आंदोलनकारियों के प्रमुख मुद्दे थे ।
  • सिंचाई परियोजनाओं के लिए भूमि का अधिग्रहण।
  • सर्वेक्षण तथा पुनर्वास की कार्यवाही, बंद कर दिए गए कैंप आदि।
  • ऋणों की उगाही, लगान तथा सहकारी ऋणों का संग्रह, वन्य उत्पादों का राष्ट्रीयकरण इत्यादि। जहाँ तक पूर्वोत्तर राज्यों के आदिवासियों की बात है, इनके प्रमुख मुद्दे थे-अपने क्षेत्र में पृथक जनजातीय पहचान, जनजातियों की पारंपरिक स्वायत्तता प्रदान करने की माँग इत्यादि। किसी कारण वश के कारण ये जनजातियाँ भारत की मुख्यधारा से पृथक रह गई। इस खाई को पाटने की आवश्यकता है। जनजातियों को कैसे अधिकार प्रदान किए जाएँ, जो उन्हें अपनी सांस्कृतिक संस्थाओं को बचाए रखने तथा शेष भारत के साथ जुड़ने में मददगार साबित हो।
  • वनों की जमीन के खोने से जनजातियों के गुस्से का निराकरण किया जाए। इस प्रकार से, जनजातीय आंदोलन समाजिक आंदोलनों का एक अच्छा उदाहरण है। इसमें कई मुद्दे शामिल हैं; जैसे आर्थिक, सांस्कृतिक, पारिस्थितिकीय आदि। पूर्व में कई पूर्वोत्तर क्षेत्रों ने भारत से अलग रहने की प्रवृत्ति का प्रदर्शन किया था, किंतु उन्होंने एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है तथा भारतीय संविध न के ढाँचे में अपनी पृथक स्वायत्तता की माँग की है।
shaalaa.com
जाति-आधारित आंदोलन
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 8: सामाजिक आंदोलन - प्रश्नावली [पृष्ठ १५९]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Sociology [Hindi] Class 12
पाठ 8 सामाजिक आंदोलन
प्रश्नावली | Q 2. | पृष्ठ १५९
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×