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निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर 'पेड़ होने का अर्थ' कविता का रसास्वादन कीजिए। मुददे- 1. रचना का शीर्षक 2. रचनाकार 3. पसंद की पंक्तियाँ 4. पसंद आने का कारण 5. कविता की केन्द्रीय कल्पना 6. प्रतीक विधान -

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प्रश्न

निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर 'पेड़ होने का अर्थ' कविता का रसास्वादन कीजिए।

मुददे-

  1. रचना का शीर्षक
  2. रचनाकार
  3. पसंद की पंक्तियाँ
  4. पसंद आने का कारण
  5. कविता की केन्द्रीय कल्पना
  6. प्रतीक विधान
दीर्घउत्तर

उत्तर

  1. रचना का शीर्षक - पेड़ होने का अर्थ 
  2. रचनाकार - डाॅ. मुकेश गौतम
  3. पसंद की पंक्तियाँ -
    जी हाँ, सच तो यह है कि
    पेड़ संत है, दधीचि है।
  4. पसंद आने का कारण - उपर्युक्त पंक्तियों में कवि ने स्पष्ट किया है कि, पेड़ संत के समान है, सदैव परोपकार की भावना रखते हैं। पेड़ दधीचि है। जिस प्रकार दधीचि ने देवताओं की रक्षा के लिए बज़ास्त्र हेतु जीते-जी अपनी अस्थियाँ भी दान कर दी। उसीं प्रकार पेड़ निःस्वार्थ होकर जीवन भर हमें प्राणवायु देते हैं। 
  5. कविता की केन्द्रीय कल्पना - सब कुछ दूसरों को देकर जीवन की सार्थकता सिद्ध करना। पेड़ मनुष्य का बहुत बड़ा शिक्षक हैं। पेड़ मनुष्य का हौसला बढ़ाता है। वह उसे समाज के प्रति जिम्मेदारी का निर्वाह करना सिखाता है। पेड़ ने भारतीय संस्कृति की जीवित रखा है और उसने मानव को संस्कारशील बनाया है।
  6. प्रतीक विधान - कवि ने पेड़ को परोपकारी, सर्वस्व न्यौछावर करने वाला दर्शाया है। ऐसे महान त्यागी के लिए. महर्षि दधीचि जैसे - महानदाता तथा संत का प्रतीक के रूप में सटीक उपयोग किया है।
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पेड़ होने का अर्थ
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