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प्रश्न
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर लगभग 50-60 शब्दों में लिखिए:
'श्रम विभाजन और जाति-प्रथा' पाठ के आधार पर लिखिए कि रुचि और क्षमता के आधार पर श्रम विभाजन न किए जाने पर कौन से दुष्परिणाम निकलते हैं?
उत्तर
आधुनिक युग में यह स्थिति अक्सर देखने को मिलती है, क्योंकि उद्योग-धंधों की प्रक्रियाओं और तकनीकों में निरंतर विकास होता रहता है, और कभी-कभी अचानक बदलाव भी हो जाते हैं। जब लोग अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार काम नहीं कर पाते, तो इसका परिणाम भुखमरी और बेरोजगारी के रूप में सामने आता है। हिन्दू धर्म में प्रचलित जाति प्रथा भी इसका एक बड़ा कारण है, क्योंकि यह किसी व्यक्ति को पैतृक पेशा बदलने की अनुमति नहीं देती। जाति प्रथा न केवल पेशे का दोषपूर्ण निर्धारण करती है, बल्कि व्यक्ति को जीवनभर के लिए उसी पेशे तक सीमित कर देती है। चाहे वह पेशा अनुपयुक्त हो या आय का साधन न हो, व्यक्ति को पेशा बदलने का अधिकार नहीं मिलता, जिससे उसकी स्थिति भुखमरी तक पहुँच जाती है।