मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (हिंदी माध्यम) इयत्ता १० वी

निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर कृतियाँ कीजिए: मेरा जीवन एक खुली किताब रहा है। मेरे न कोई रहस्‍य हैं और न मैं रहस्‍यों को प्रश्रय देता हूँ। - Hindi [हिंदी]

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प्रश्न

निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

मेरा जीवन एक खुली किताब रहा है। मेरे न कोई रहस्‍य हैं और न मैं रहस्‍यों को प्रश्रय देता हूँ।

मैं पूरी तरह भला बनने के लिए संघर्षरत एक अदना-सा इनसान हूँ। मैं मन, वाणी और कर्म से पूरी तरह सच्चा और पूरी तरह अहिंसक बनने के लिए संघर्षरत हूँ। यह लक्ष्य सच्चा है, यह मैं जानता हूँ पर उसे पाने में बार-बार असफल हो जाता हॅूं। मैं मानता हूँ कि इस लक्ष्य तक पहुँचना कष्‍टकर है पर यह कष्‍ट मुझे निश्चित आनंद देने वाला लगता है। इस तक पहुँचने की प्रत्‍येक सीढ़ी मुझे अगली सीढ़ी तक पहुँचने के लिए शक्‍ति तथा सामर्थ्य देती है।

जब मैं एक ओर अपनी लघुता और अपनी सीमाओं के बारे में सोचता हूँ और दूसरी ओर मुझसे लोगों की जो अपेक्षाएँ हो गई हैं, उनकी बात सोचता हूँ तो एक क्षण के लिए तो मैं स्‍तब्‍ध रह जाता हूँ। फिर यह समझकर प्रकृतिस्‍थ हो जाता हूँ कि ये अपेक्षाएँ मुझसे नहीं हैं। ये सत्‍य और अहिंसा के दो अमूल्‍य गुणों के मुझमें अवतरण हैं। यह अवतरण कितना ही अपूर्ण हो पर मुझमें अपेक्षाकृत अधिक द्रष्‍टव्य है। 

(1) कारण लिखिए:      (2)

  1. लेखक का जीवन एक खुली किताब है -
  2. लेखक प्रकृतिस्थ हो जाते हैं -

(2) लिखिए :     (2)

(i)

(ii)

(3) 'कथनी और करनी में समानता होनी चाहिए' विषय पर 30 से 40 शब्दों में अपने विचार लिखिए।    (3)

थोडक्यात उत्तर
तक्ता
एका वाक्यात उत्तर

उत्तर

(1) 

  1. लेखक का जीवन एक खुली किताब है क्योंकि उनके पास कोई रहस्य नहीं है और वे रहस्यों को प्रश्रय नहीं देते।
  2. लेखक प्रकृतिस्थ हो जाते हैं क्योंकि वे समझते हैं कि लोगों की अपेक्षाएँ उनसे नहीं बल्कि सत्य और अहिंसा के उनके गुणों से हैं।

(2) (i)

(ii)

(3) कथनी और करनी में समानता ईमानदारी और विश्वास की आधारशिला है। यह व्यक्तित्व की सच्चाई को प्रकट करता है और सामाजिक सम्बन्धों में मजबूती लाता है। इससे व्यक्ति समाज में आदर और प्रेरणा का स्रोत बनता है।

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