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निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए- चारों ओर हुई हरियाली कहे मयूरा, सदियों का जो सपना है हो जाए पूरा। -

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प्रश्न

निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-

चारों ओर हुई हरियाली कहे मयूरा, सदियों का जो सपना है हो जाए पूरा।
एक यहाँ पर नहीं अकेला, होगी टोली, सोंधी-सोंधी सी सुगंध, माटी से बोली।।
बाग-बगीचे, ताल-तलैया, सब मुस्काएँ, झूम-झूमकर मस्ती में तरु गीत सुनाएँ।

(1) उचित जोड़ियाँ मिलाइए- (अपने पद के अनुसार)  (2)

उत्तर
अकेला ______ मुस्काएँ
सोंधी-सोंधी ______ टोली
बाग-बगीचे ______ गीत
झूम-झूमकर ______ माटी

(2) पहली दो पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए।  (2)

थोडक्यात उत्तर
जोड्या लावा/जोड्या जुळवा

उत्तर

(1)

उत्तर
अकेला टोली
सोंधी-सोंधी माटी
बाग-बगीचे मुस्काएँ
झूम-झूमकर गीत

(2) ‘सोंधी सुगंध’ इस गीत में कवि डॉ. कृपाशंकर शर्मा ‘अचूक’ जी ने वर्षा ऋतु का आगमन होने पर प्रकृति में छाई प्रसन्नता एवं खुशहाली का बड़ा ही सजीव एवं मनोहारी वर्णन किया है। मोर को भी वर्षाऋतु अत्यंत प्रिय है। अत: वह भी वर्षाऋतु में खुश होकर कह रहा है कि चारों ओर हरियाली ही हरियाली छा गई है। बादल बरसने के बाद हरियाली-सा हरा वस्त्र धारण करने का धरती का जो सपना था; वह अब पूरा हो गया है। सोंधी सुगंध मिट्टी से कह रही है कि प्रकृति के सभी अपादान अपनी-अपनी टोली में एकत्रित होकर आनंद व्यक्त कर रहे हैं। वर्षाऋतु के इस सुहावने व मनभावन मौसम में कोई भी अकेला रहना नहीं चाहता।

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सोंधी सुगंध
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