मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (इंग्रजी माध्यम) इयत्ता १० वी

निम्नलिखित पठित पद्याशं पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए: हरि बिन कूण गती मेरी ।। तुम मेरे प्रतिपाल कहिये मैं रावरी चेरी ।। आदि-अंत निज नाँव तेरो हीमायें फेरी । - Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

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प्रश्न

निम्नलिखित पठित पद्याशं पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

हरि बिन कूण गती मेरी।।
तुम मेरे प्रतिपाल कहिये मैं रावरी चेरी।।
आदि-अंत निज नाँव तेरो हीमायें फेरी।
बेर-बेर पुकार कहूँ प्रभु आरति है तेरी ।।
यौ संसार बिकार सागर बीच में घेरी ।
नाव फाटी प्रभु पाल बाँधो बूड़त है बेरी ।।
बिरहणि पिवकी बाट जौवै राखल्‍यो नेरी ।
दासी मीरा राम रटत है मैं सरण हूँ तेरी ।।
  1. कोष्ठक में दिए गए शब्दों में से उचित शब्द घुनकर लिखिये:    [2]
    (विरहणि, हरि, मीरा, नाव, आरति)
    1. अपने आप को चेरी मानने वाली - ______
    2. मीराबाई का प्रतिपाल करने वाले - ______
    3. संसार बिकार में घिरने वाली - ______
    4. पिवकी बाट देखने वाली - ______
  2. निम्न शब्दों के अर्थ पद्याशं से ढूँढ़कर लिखिए:    [1]
    1. अर्थ शब्द
      दासी ______
      भगवान ______
    2. पदयांश में उल्लेखित शब्दयुग्म दूँढ़कर लिखिए:     [1]
      1. ______
      2. ______
  3. उपर्युक्त पद्याशं की अंतिम चार पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए।     [2]
आकलन

उत्तर

    1. पने आप को चेरी मानने वाली - मीरा
    2. मीराबाई का प्रतिपाल करने वाले - हरि
    3. संसार बिकार में घिरने वाली - नाव
    4. पिवकी बाट देखने वाली - बिरहणि 
    1. अर्थ शब्द
      दासी चेरी 
      भगवान प्रभु 

      1. आदि-अंत
      2. बेर-बेर
  1. मीराबाई कहती हैं कि यह संसार बुराइयों और विकारों का विशाल सागर है, जिसमें उनकी नाव फँस गई है। उनकी नाव अब टूट चुकी है और इसके डूबने में अधिक समय नहीं लगेगा। मीराबाई प्रभु से विनती करती हैं कि उनकी नाव के पाल ठीक कर दें। वे कहती हैं कि एक बिरहणि के रूप में वे सिर्फ प्रभु की राह देख रही हैं। आपकी दासी मीरा आपकी शरण में आई है और हर पल केवल आपका नाम ही जपती रहती है।
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