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प्रश्न
उत्तर
भारत जैसे देश में यह आम बात है। सरकार की तरफ से बहुत प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ता है। भारत जैसे देश में लड़कियों को बोझ समझा जाता है। यहाँ पर बेटी होने का अर्थ है, दहेज की बड़ी रकम और लड़कों वालों के आगे हाथ बाँधकर खड़े रहना। अतः लोग बेटी चाहते ही नहीं है और यदि हो जाती है, तो उसे जानबुझकर छोटी उम्र में ब्याह कर पल्ला झाड़ लिया जाता है।
मैं दिल्ली की निवासी हूँ और आर. के. पुरम. में रहती हूँ। प्रायः मैं जब मोती बाग की रेड-लाइट से होकर गुजरती हूँ, तो मुझे वहाँ एक लड़की दिखाई देती है। वह बहुत प्यारी थी। राजस्थानी भाषा में फूल बेचने के लिए मेरी कार के पास आ जाया करती थी। बात करने पर पता चला कि वह राजस्थान के एक गाँव से अपने पति के साथ यहाँ आई है। उसकी आयु मात्र 14 साल की एक थी। उसका विवाह तब करवा दिया गया था, जब 6 महीने की थी। उनके यहाँ सामूहिक विवाह होता है। जिसमें सभी माता-पिता बिना अधिक खर्चा किए विवाह कर दिया करते हैं। फिर एक वर्ष बाद मेरा वहाँ से जाना हुआ। मैं यह देखकर हैरान रह गई कि उसकी गोद में दो महीने का बच्चा था। उसकी दशा देखकर में दंग रह गई। वह बहुत कमज़ोर हो चुकी थी। एक 14 साल की बच्ची अब स्वयं एक बच्चे की माँ थी।
यदि इस प्रकार की घटना अब भी होती है, तो आप सोचिए भारत का भविष्य कैसा होगा?
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