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पढ़ना-लिखना सब अकारथ गया। वृद्ध मुंशी जी द्वारा यह बात एक विशिष्ट संदर्भ में कही गई थी। अपने निजी अनुभव के आधार पर बताइए- जब आपको पढ़ना-लिखना व्यर्थ लगा हो। - Hindi (Core)

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प्रश्न

पढ़ना-लिखना सब अकारथ गया। वृद्ध मुंशी जी द्वारा यह बात एक विशिष्ट संदर्भ में कही गई थी। अपने निजी अनुभव के आधार पर बताइए-

जब आपको पढ़ना-लिखना व्यर्थ लगा हो।

थोडक्यात उत्तर

उत्तर

जब पूरी तरह शिक्षा ग्रहण करने के बाद भी मुझे अपने योग्यता के लायक नौकरी नहीं मिली तो लगा कि मेरा पढ़ना-लिखना व्यर्थ है।

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नमक का दारोगा
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पाठ 1.01: नमक का दारोगा - अभ्यास [पृष्ठ १७]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi - Aaroh Class 11
पाठ 1.01 नमक का दारोगा
अभ्यास | Q 4. (क) | पृष्ठ १७

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वृद्ध मुंशी 


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वकील


कहानी के लगभग सभी पात्र समाज की किसी-न-किसी सच्चाई को उजागर करते हैं।निम्नलिखित पात्र के संदर्भ में पाठ से उस अंश को उद्धृत करते हुए बताइए कि यह समाज की किस सच्चाई को उजागर करता हैं-

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पढ़ना-लिखना सब अकारथ गया। वृद्ध मुंशी जी द्वारा यह बात एक विशिष्ट संदर्भ में कही गई थी। अपने निजी अनुभव के आधार पर बताइए-

जब आपको पढ़ना-लिखना सार्थक लगा हो।


पढ़ना-लिखना सब अकारथ गया। वृद्ध मुंशी जी द्वारा यह बात एक विशिष्ट संदर्भ में कही गई थी। अपने निजी अनुभव के आधार पर बताइए-

“पढ़ना-लिखना' को किस अर्थ में प्रयुक्त किया गया होगा:

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