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प्रेरणा शब्द पर सोचिए और उसके महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए जीवन के वे प्रसंग याद कीजिए जब माता-पिता, दीदी-भैया, शिक्षक या कोई महापुरुष/महानारी आपके अँधेरे क्षणों में प्रकाश भर गए। - Hindi (Core)

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प्रश्न

प्रेरणा शब्द पर सोचिए और उसके महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए जीवन के वे प्रसंग याद कीजिए जब माता-पिता, दीदी-भैया, शिक्षक या कोई महापुरुष/महानारी आपके अँधेरे क्षणों में प्रकाश भर गए।

दीर्घउत्तर

उत्तर

प्रेरणा वह स्रोत है, जो मनुष्य को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। यह वह भावना है, जो मन तथा हृदय में वास कर जाए, तो मनुष्य पहाड़ में भी छेद कर देता है। प्रेरणा ने ही बड़े-से-बड़े कार्य को संभव बनाया है। माँझी जिसे आज 'आयरन मेन' के नाम से जाना जाता है। उसकी पत्नी की मृत्यु ने उसे ऐसी प्रेरणा दी कि उसने गाँव के मध्य खड़े पहाड़ को भेद डाला। उसने आने वाली पीढ़ी के लिए ऐसा रास्ता बना डाला कि किसी की मृत्यु उसकी पत्नी के समान न हो। यह प्रेरणा स्रोत ही तो है, जिसने हाड-माँस के मनुष्य को 'आयरन मेन' की उपाधि दिलवा डाली। प्रेरणा का अहसास जीवन की दिशा बदल सकता है। मृत्यु को जीवन में और कष्टों को सुख में बदल सकता है। अतः इसका महत्त्व जितना भी गाया, जाए कम है।

मेरे जीवन में बात उस समय की है, जब मैं परीक्षा से दो महीने पहले बीमार पड़ गया। पीलिया की बीमारी ने ऐसा घेरा की मेरे बिस्तर में से उठना कठिन हो गया। मेरी लापरवाही ने बीमारी को और भयंकर बना दिया। 15 दिन अस्पताल में और 30 दिन बिस्तर में पड़ा रहा। माता-पिता को मेरी चिंता थी। अपनी बीमारी के कारण में स्वयं को असहाय पाता था। आखिरकार मेरी कक्षा अध्यापिका का मुझसे मिलना हुआ। वे मुझे देखने घर पर आईं। उनके बोले कुछ शब्दों ने मेरे हृदय में प्रेरणा का स्रोत भर दिया। उनका कहना था कि तुम्हारे अंदर कुछ कर दिखाने का इरादा है और मैं यह जानती हूँ कि यह बीमारी तुम्हें नहीं रोक सकती है। जाने कैसा जादू किया उनके इन शब्दों ने और मैं उसी दिन से तैयारी में लग गया। माता-पिता नहीं चाहते थे कि मैं इस साल परीक्षा दूँ। डॉक्टर ने मुझे चार महीने तक पूरा आराम करने के लिए कहा था। मैं उनकी बात नहीं माना। बिस्तर में लेटे-लेटे ही मैं अपनी तैयारी पूरी करने लगा। पिताजी और माताजी मुझे साथ लेकर परीक्षा देने ले जाते थे। जब मेरा परीक्षा परिणाम सामने आया, तो अध्यापिका ने मेरे कंधे पर हाथ रखा और कहा- 'देखा तुम्हें कोई नहीं रोक सकता।' उस साल मैंने दसवीं के बोर्ड में प्रथम स्थान प्राप्त किया। जितना दंग अन्य लोग थे, उतना मैं स्वयं दंग था। आज मैं बारहवीं कक्षा में हूँ और अपनी अध्यापिका के वचन कभी नहीं भूलता। उस समय उनके द्वारा मिली प्रेरणा ने मेरे जीवन की दिशा, तब बदल दी जब में हताशा हो चूका था।
(नोट: विद्यार्थी प्रयास करें कि इस प्रश्न में अपना अनुभव लिखें तभी इस प्रश्न का उत्तर पूर्ण हो पाएगा।)
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सहर्ष स्वीकारा है
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पाठ 5: गजानन माधव मुक्तिबोध (सहर्ष स्वीकारा है) - अभ्यास [पृष्ठ ३३]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi - Aaroh Class 12
पाठ 5 गजानन माधव मुक्तिबोध (सहर्ष स्वीकारा है)
अभ्यास | Q 2. | पृष्ठ ३३

संबंधित प्रश्‍न

टिप्पणी कीजिएः गरबीली गरीबी, भीतर की सरिता, बहलाती सहलाती आत्मीयता, ममता के बादल।


इस कविता में और भी टिप्पणी-योग्य पद-प्रयोग हैं। ऐसे किसी एक प्रयोग का अपनी ओर से उल्लेख कर उस पर टिप्पणी करें।


व्याख्या कीजिएः
जाने क्या रिश्ता है, जाने क्या नाता है
जितना भी उँड़ेलता हूँ, भर-भर फिर आता है
दिल में क्या झरना है?
मीठे पानी का सोता है
भीतर वह, ऊपर तुम
मुसकाता चाँद ज्यों धरती पर रात-भर
मुझ पर त्यों तुम्हारा ही खिलता वह चेहरा है!

उपर्युक्त पंक्तियों की व्याख्या करते हुए यह बताइए कि यहाँ चाँद की तरह आत्मा पर झुका चेहरा भूलकर अंधकार-अमावस्या में नहाने की बात क्यों की गई है?


बहलाती सहलाती आत्मीयता बरदाश्त नहीं होती है- और कविता के शीर्षक सहर्ष स्वीकारा है में आप कैसे अंतर्विरोध पाते हैं। चर्चा कीजिए।


अतिशय मोह भी क्या त्रास का कारक है? माँ का दूध छूटने का कष्ट जैसे एक ज़रूरी कष्ट है, वैसे ही कुछ और ज़रूरी कष्टों की सूची बनाएँ।

'भय' शब्द पर सोचिए। सोचिए कि मन में किन-किन चीज़ों का भय बैठा है? उससे निबटने के लिए आप क्या करते हैं और कवि की मनःस्थिति से अपनी मनःस्थिति की तुलना कीजिए।


तुम्हें भूल जाने की
दक्षिण ध्रुवी अंधकार-अमावस्या
शरीर पर, चेहरे पर, अंतर में पा लूँ मैं
झेलूँ मैं, उसी में नहा लूँ मैं
इसलिए कि तुमसे ही परिवेष्टित आच्छादित
रहने का रमणीय यह उजेला अब
सहा नहीं जाता है।

  1. यहाँ अंधकार-अमावस्या के लिए क्या विशेषण इस्तेमाल किया गया है उससे विशेष्य में क्या अर्थ जुड़ता है?
  2. कवि ने व्यक्तिगत संदर्भ में किस स्थिति को अमावस्या कहा है?
  3. इस स्थिति से ठीक विपरीत ठहरने वाली कौन-सी स्थिति कविता में व्यक्त हुई है? इस वैपरीत्य को व्यक्त करने वाले शब्द का व्याख्यापूर्वक उल्लेख करें।
  4. कवि अपने संबोध्य (जिसको कविता संबंधित है कविता का 'तुम') को पूरी तरह भूल जाना चाहता है, इस बात को प्रभावी तरीके से व्यक्त करने के लिए क्या युक्ति अपनाई है? रेखांकित अंशों को ध्यान में रखकर उत्तर दें।

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