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प्रश्न
पढ़ाई का नियोजन करते हुए अपनी दिनचर्या लिखो।
उत्तर
मेरा स्कूल सुबह साढ़े सात बजे से दोपहर दो बजे तक रहता है। मैं ढाई बजे घर आ जाता हूँ। खाना खाने और थोड़ा आराम करने के बाद मैं अपने स्कूल का गृहकार्य करने बैठ जाता हूँ। फिर गृहकार्य पूरा कर मैं खेलने चला जाता हूँ, क्योंकि मेरी उम्र के सभी बच्चे उसी समय अपनी पढ़ाई आदि खत्म करके खेलने आते हैं। दो घंटा खेलने के बाद मैं घर आता हूँ। खाना खाते समय मैं टीवी पर समाचार और डिस्कवरी जैसे ज्ञानवर्धक चैनल देखता हूँ। फिर स्कूल बैग तैयार करके दस बजे मैं सोने चला जाता हूँ। इस तरह यह मेरी दिनचर्या सुबह से रात तक की है।
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“कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए 'असंभव', 'गंदा' या 'नीचा' शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।'' ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।'' मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है ? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और 'निर्मल हृदय' जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं। |