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प्रश्न
पृथ्वी के केंद्र पर ‘g’ का मान शून्य होता है इस संबंधि स्पष्टीकरण लिखिए।
उत्तर
पृथ्वी की सतह से उसके केंद्र की ओर जाते समय g का मान परिवर्तित होता है। यह क्रमशः कम होता जाता है और पृथ्वी के केंद्र पर शून्य हो जाता है।
OA = R, AP = d, OP = R - d, यह भाग (छायांकित भाग, II) प्रभावकारी नहीं होता। R - d = OP पृथ्वी के केंद्र से दुरी |
M' = `4/3`π(R - d)3 × `M/(4/3piR^3) = (M(R - d)^3)/(R^3)`
स्पष्टीकरण : हम यह मान लेते हैं कि पृथ्वी एकसमान घनत्व तथा M द्रव्यमानवाला एक गोलाकार पिंड है। आकृति में दिखाए अनुसार पृथ्वी के पृष्ठ के पृष्ठभाग के अंदर d गहराई पर स्थित किसी बिंदु P पर विचार करो। यदि इस स्थान पर m द्रव्यमानवाला कोई द्रव्यकण रखें, तो उस पर क्रियाशील पृथ्वी का गुरुत्व बल,
F = `(GmM^')/((R - d)^{2'})`
इसमें R = पृथ्वी की त्रिज्या, M' = (R - d) त्रिज्यावाले गोले का द्रव्यमान है। इस स्थान पर P के बाहरवाला भाग (आकृति का भाग II) प्रभवाकारी नहीं होगा। स्थान P पर गुरुत्व जनित त्वरण
g = `F/m`
= `G/(R - d)^2 xx (M(R - d)^3)/R^3`
= `(GM(R - d))/R^3`
का मान, पृथ्वी के पृष्ठभाग के गुरुत्व जनित त्वरण के मान `((GM)/R^2)` की अपेक्षा कम है।
यदि d का मान बढ़ाते जाएँ, तो g का मान कम होता जाएगा और पृथ्वी के केंद्र पर (d = R) होने के कारण g का मान शून्य हो जाएगा।
M' ज्ञात करने के लिए, घनत्व = `"द्रवमान"/"आयतन"` सूत्र का उपयोग किया गया है।