मराठी

पर्यावरणीय संसाधनों की पूर्ति-माँग के उत्क्रमण कैसे वर्तमान पर्यावरण संकट के उत्तरदायी हैं? समझाएँ। - Economics (अर्थशास्त्र)

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

पर्यावरणीय संसाधनों की पूर्ति-माँग के उत्क्रमण कैसे वर्तमान पर्यावरण संकट के उत्तरदायी हैं? समझाएँ।

दीर्घउत्तर

उत्तर

अर्थ - पर्यावरण अपने कार्य बिना किसी रुकावट या बाधा के तब तक कर सकता है जब तक संसाधनों की माँग उनकी पूर्ति से कम हो। जब माँग, पूर्ति से अधिक हो जाती है तो पर्यावरण अपने कार्य सुरीति करने में असक्षम हो जाता है इससे पर्यावरण संकट जन्म लेता है। इसे पूर्ति-माँग के उत्क्रमण की संज्ञा दी जाती है। दूसरे शब्दों में, जब संसाधनों की उत्पादन तथा उपभोग माँग संसाधनों के पुनर्जनन दर से अधिक हो जाती है तो इससे पर्यावरण की अवशोषी क्षमता पर दुष्प्रभाव पड़ता है, इसे पूर्ति संसाधनों की पूर्ति माँग का उत्क्रमण कहा जाता है। इसके निम्नलिखित कारण हैं। 

(क) विकासशील देशों की बढ़ती जनसंख्या

(ख) विकसित देशों के संपन्न उपभोग तथा उत्पादन स्तर

(ग) नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की गहन और व्यापक निकासी।

भारत के पर्यावरण को दो तरफ से खतरा है। एक तो निर्धनता के कारण पर्यावरण का अपक्षय और दूसरा खतरा साधन संपन्नता और तेजी से बढ़ते हुए औद्योगिक क्षेत्रक के प्रदूषण से है।

भारत की अत्यधिक गंभीर पर्यावरण समस्याओं में वायु प्रदूषण, दूषित जल, मृदा क्षरण, वन्य कटाव और वन्य जीवन की विलुप्ति है।

(क) जल-प्रदूषण - भारत में ताजे जल के सर्वाधिक स्रोत अत्यधिक प्रदूषित होते जा रहे हैं। इनकी सफाई में सरकार को भारी व्यय करना पड़ रहा है। 120 करोड़ की जनसंख्या के लिए स्वच्छ जल का प्रबंधन सरकार के लिए एक बड़ी समस्या है। जल जीवों की विविधता भी विलुप्त होती दिखाई दे रही है।

(ख) भूमि अपक्षय - भारत में भूमि का अपक्षय विभिन्न मात्रा और रूपों में हुआ है, जो कि मुख्य रूप से अस्थिर प्रयोग और अनुपयुक्त (प्रबंधन) कार्य प्रणाली का परिणाम है।

(ग) ठोस अवशिष्ठ प्रबंधन - विश्व की 17% जनसंख्या और विश्व पशुधन की 20% जनसंख्या भारत की मात्र 2.5% क्षेत्रफल में रहती है। जनसंख्या और पशुधन का अधिक घनत्व और वानिकी, कृषि, चराई, मानव बस्तियाँ और उद्योगों के प्रतिस्पर्धी उपयोगों से देश के निश्चित भूमि संसाधनों पर भारी दबाव पड़ता है।

(घ) जैविक विविधता की हानि - प्रदूषण के कारण बहुत से पशु-पक्षियों और पौधों को प्रजातियाँ विलुप्त होती जा रही है। इसका हमारे पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पेड़े रहा है।

(ङ) शहरी क्षेत्रों में वाहन प्रदूषण से उत्पन्न वायु प्रदूषण - भारत के शहरी क्षेत्रों में वायु-प्रदूषण बहुत है, जिसमें वाहनों का सर्वाधिक योगदान है। कुछ अन्य क्षेत्रों में उद्योगों के भारी जमाव और तापीय शक्ति संयंत्रों के कारण वायु-प्रदूषण होता है। वाहन उत्सर्जन चिंता का प्रमुख कारण है क्योंकि यह धरातल पर वायु-प्रदूषण का स्रोत है और आम जनता पर अधिक प्रभाव डालता है।

(च) मृदा क्षरण - भारत ने एक वर्ष में भूमि का क्षरण 53 बिलियन टन प्रतिशत की दर से हो रहा है। भारत सरकार के अनुसार, प्रत्येक वर्ष मृदा क्षरण से 5.8 मिलियन से 8.4 मिलियन टन पोषक तत्वों की क्षति होती है।

shaalaa.com
धारणीय विकास की रणनीतियाँ
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 9: पर्यावरण और धारणीय विकास - अभ्यास [पृष्ठ १८३]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Economics [English] Class 12
पाठ 9 पर्यावरण और धारणीय विकास
अभ्यास | Q 15. | पृष्ठ १८३

संबंधित प्रश्‍न

निम्न को नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय संसाधनों में वर्गीकृत करें।

वृक्ष


निम्न को नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय संसाधनों में वर्गीकृत करें।

मछली


निम्न को नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय संसाधनों में वर्गीकृत करें।

पेट्रोलियम


निम्न को नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय संसाधनों में वर्गीकृत करें।

कोयला


निम्न को नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय संसाधनों में वर्गीकृत करें।

लौह अयस्क


निम्न को नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय संसाधनों में वर्गीकृत करें।

जल


भारत में धारणीय विकास की प्राप्ति के लिए उपयुक्त उपायों की रूपरेखा प्रस्तुत करें।


इनके दो उदाहरण दें।

पर्यावरणीय संसाधनों का अति प्रयोग


इनके दो उदाहरण दें।

पर्यावरणीय संसाधनों का दुरुपयोग


पर्यावरण की चार प्रमुख क्रियाओं का वर्णन कीजिए। महत्त्वपूर्ण मुद्दों की व्याख्या कीजिए।


अपने आस-पास के क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए धारणीय विकास की चार रणनीतियाँ सुझाइए।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×