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पुशबूम क्रमवीक्षक की कार्य-प्रणाली का संक्षेप में वर्णन करें। - Geography (भूगोल)

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प्रश्न

पुशबूम क्रमवीक्षक की कार्य-प्रणाली का संक्षेप में वर्णन करें।

थोडक्यात उत्तर

उत्तर

पुशबूम क्रमवीक्षक बहुत सारे संसूचकों पर आधारित होता है, जिनकी संख्या विभेदन के कार्य-क्षेत्र को क्षेत्रीय विभेदन से विभाजित करने से प्राप्त संख्या के समान होती है। उदाहरण के लिए फ्रांस के सुदूर संवेदन उपग्रह स्पॉट में लगे उच्च विभेदन दृश्य विकिरणमापी संवेदक का कार्य-क्षेत्र 60 किलोमीटर है तथा उसका क्षेत्रीय विभेदन 20 मीटर है। अगर हम 60 किलोमीटर अथवा 60,000 मीटर को 20 मीटर से विभाजित करें तो हमें 3,000 का आँकड़ा प्राप्त होगा अर्थात् SPOT में लगे HRV-1 संवेदक में 3,000 संसूचक लगाए गए हैं। पुशबूम स्कैनर में सभी डिटेक्टर पंक्ति में क्रमबद्ध होते हैं और प्रत्येक डिटेक्टर पृथ्वी के ऊपर अधोबिन्दु दृश्य पर 20 मीटर के आयाम वाली परावर्तित ऊर्जा का संग्रहण करते हैं।

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सुदूर संवेदन की अवस्थाएँ
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पाठ 7: सुदूर संवेदन का परिचय - अभ्यास [पृष्ठ १०१]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Practical Work in Geography [Hindi] Class 11
पाठ 7 सुदूर संवेदन का परिचय
अभ्यास | Q 2. (iii) | पृष्ठ १०१

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