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प्रश्न
पुष्पी पादपों में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के बीजांडासन्यासों का वर्णन करो।
उत्तर
बीजांडन्यास अंडाशय में मृदूतकीय जरायु पर बीजांड के लगने के क्रम को बीजांडन्यास कहते हैं। यह निम्नलिखित प्रकार का होता है
1. सीमांत:
यह एकअण्डपी अंडाशय में पाया जाता है। अंडाशय एककोष्ठीय होता है, बीजांड अक्षीय सन्धि पर विकसित होते हैं; जैसे–चना, मटर, सेम आदि के शिम्बे फलों में।
2. स्तंभीय:
यह द्विअंडपी, त्रिअंडपी या बहुअंडपी, युक्तांडपी अंडाशय में पाया जाता है। अंडाशय में जितने अंडप होते हैं, उतने ही कोष्ठकों का निर्माण होता है। बीजांड अक्षवर्ती जरायु से लगे रहते हैं; जैसे-आलू, टमाटर, मकोय, गुड़हल आदि में।
3. भित्तीय:
यह बहुअंडपी, एककोष्ठीय अंडाशय में पाया जाता है। इसमें जहाँ अंडपों के तट मिलते हैं, वहाँ जरायु विकसित हो जाता है। जरायु (बीजांडासन) पर बीजांड लगे होते हैं, अर्थात् बीजांड अंडाशय की भीतरी सतह पर लगे रहते हैं; जैसे-पपीता, सरसों, मूली आदि में।
4. मुक्त स्तंभीय:
यह बहुअंडपी, एककोष्ठीय अंडाशय में पाया जाता है। इसमें बीजांड केन्द्रीय अक्ष के चारों ओर लगे होते हैं। केन्द्रीय अक्ष का सम्बन्ध अंडाशय भित्ति से नहीं होता; जैसे- डायऐंथस, प्रिमरोज आदि।
5. आधारलग्न:
यह द्विअंडपी, एककोष्ठीय अंडाशय में पाया जाता है जिसमें केवल एक बीजांड पुष्पाक्ष से लगा रहता है; जैसे- कम्पोजिटी कुल के सदस्यों में।
6. धरातलीय:
यह बहुअंडपी, बहुकोष्ठीय अंडाशय में पाया जाता है। इसमें बीजांडासन या जरायु कोष्ठकों की भीतरी सतह पर विकसित होते हैं, अर्थात् बीजांड कोष्ठकों की भीतरी सतह पर व्यवस्थित रहते हैं; जैसे- कुमुदिनी में।
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