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रोहित ने कहा था, “कितनी पुस्तकें बेकार जाती होंगी। एक बार पढ़ी और फिर बेकार हो गईं।” क्या सचमुच में ऐसा होता है? - Hindi (हिंदी)

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प्रश्न

रोहित ने कहा था, “कितनी पुस्तकें बेकार जाती होंगी। एक बार पढ़ी और फिर बेकार हो गईं।” क्या सचमुच में ऐसा होता है?

एका वाक्यात उत्तर

उत्तर

वे ही पुस्तकें बर्बाद होती हैं जिन्हें लोग पढ़कर फेंक देते हैं या कबाड़ी वाले से बेच देते हैं। यदि पुस्तकें पढ़कर उन्हें हिफाजत से रख दी जाएं तो वे कभी बर्बाद नहीं होतीं बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी पढ़ी जाती हैं और उनकी उपयोगी बातें जीवन में उतारी जाती हैं।

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वे दिन भी क्या दिन थे
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 8: वे दिन भी क्या दिन थे - वे दिन भी क्या दिन थे [पृष्ठ ६५]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi - Rimjhim Class 5
पाठ 8 वे दिन भी क्या दिन थे
वे दिन भी क्या दिन थे | Q 2. | पृष्ठ ६५

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