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शैवाल के आर्थिक महत्त्व पर टिप्पणी लिखो। - Biology (जीव विज्ञान)

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प्रश्न

शैवाल के आर्थिक महत्त्व पर टिप्पणी लिखो।

थोडक्यात उत्तर

उत्तर

शैवाल का आर्थिक महत्त्व

1. भोजन के रूप में:

पृथ्वी पर होने वाले प्रकाश संश्लेषण का 50% शैवालों द्वारा होता है। शैवाल कार्बोहाइड्रेट, खनिज तथा विटामिन्स से भरपूर होते हैं पोरफाइरा, एलेरिया, अल्वा, सारगासम, लेमिनेरिया आदि खाद्य पदार्थ के रूप में प्रयोग किए जाते हैं क्लोरेला में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन्स तथा विटामिन्स पाए जाते हैं। इसे भविष्य के भोजन के रूप में पहचाना जा रहा है इससे हमारी बढ़ती जनसंख्या की खाद्य समस्या के हल होने की पूरी सम्भावना है ।

2. शैवाल व्यवसाय में:

  1. डायटम के जीवाश्म/मृत शरीर डायटोमेशियस मृदा बनाते हैं। यह मृदा 1500°C ताप सहन कर लेती है। इसका उद्योगों में विविध प्रकार से उपयोग किया जाता है; जैसे–धातु प्रलेप, वार्निश, पॉलिश, टूथपेस्ट, ऊष्मारोधी सतह आदि।
  2. कोन्ड्रस, यूक्यिमा आदि शैवालों से कैरागीनिन प्राप्त होता है। इसका उपयोग शृंगार-प्रसाधनों, शैम्पू आदिबनाने में किया जाता है।
  3. एलेरिया, लेमिनेरिया आदि से एल्जिन प्राप्त होता है। इसका उपयोग अज्वलनशील फिल्मों, कृत्रिम रेशों आदि के निर्माण में किया जाता है यह शल्य चिकित्सा के समय रक्त प्रवाह रोकने में भी प्रयोग किया जाता है।
  4. अनेक समुद्री शैवालों से आयोडीन, ब्रोमीन आदि प्राप्त की जाती है।
  5. क्लोरेला से प्रतिजैविक क्लोरेलीन प्राप्त होती है। यह जीवाणुओं को नष्ट करती है। कारा तथा नाइटेला शैवालों की उपस्थिति से जलाशय के मच्छर नष्ट होते हैं; अतः ये मलेरिया उन्मूलन में सहायक होते हैं |
  6. लाल शैवालों से एगार-एगार प्राप्त होता है, इसका उपयोग कृत्रिम संवर्धन के लिए किया जाता है।
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पाठ 3: वनस्पति जगत - अभ्यास [पृष्ठ ३५]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Biology [Hindi] Class 11
पाठ 3 वनस्पति जगत
अभ्यास | Q 5. (i) | पृष्ठ ३५
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