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प्रश्न
शब्द संपदा -
शब्दों के लिंग, वचन, विलोमार्थक, समानार्थी, पर्यायवाची, शब्दयुग्म, अनेक शब्दों के लिए एक शब्द, भिन्नार्थक शब्द, कठिन शब्दों के अर्थ, विरामचिह्न, उपसर्ग-प्रत्यय पहचानना/अलग करना, लय-ताल युक्त शब्द ।
उत्तर
- लिंग: संज्ञा के जिस रूप से किसी वस्तु की जाति (पुरुष अथवा स्त्री) का बोध होता है, उसे लिंग कहते हैं।
लिंग के दो भेद हैं:- पुल्लिंग: संज्ञा के जिस रूप से पुरुष जाति का बोध होता है, उसे पुल्लिंग कहते हैं।
उदाहरण:
- मेरा वजन बढ़ता ही जा रहा है।
- मैं वन में जाना चाहता हूँ।
- स्त्रीलिंग: संज्ञा के जिस रूप से स्त्री जाति का बोध होता है, उसे स्त्रीलिंग कहते हैं।
उदाहरण:- एक कमरे में दो खटिया पड़ी थी।
- एक साल से हम उसकी तलाश कर रहे हैं।
- पुल्लिंग: संज्ञा के जिस रूप से पुरुष जाति का बोध होता है, उसे पुल्लिंग कहते हैं।
- वचन: संज्ञा अथवा सर्वनाम के जिस रूप से यह ज्ञात हो कि वह एक के लिए प्रयुक्त हुआ है अधवा एक से अधिक के लिए उसे वचन कहते हैं।
वचन के दो भेद हैं:
- एकवचन: जिस शब्द के रूप से एक का बोध हों, उसे एकवचन कहते हैं।
उदाहरण:
- गाय घास खा रही है।
- लकड़ी टूट गई।
- बहुवचन: जिस शब्द के रूप से एक से अधिक का बोध हो, उस बहुबचन कहते है।
उदाहरण:
- वह मालाएँ खरीद रहा है।
- कपड़े अभी सूख रहे हैं।
- एकवचन: जिस शब्द के रूप से एक का बोध हों, उसे एकवचन कहते हैं।
- विलोमार्थक शब्द: एक-दूसरे के विपरीत या उल्टा अर्थ देने वाले शब्दों को, विलोमा शब्द कहते है अर्थात् जो शब्द किसी दूसरे शब्द का उल्टा अर्थ बताते हैं, उन्हें विलोम शब्द या विपरीतार्थक शब्द या विरुद्धार्थी शब्द कहते है।
उदाहरण: कड़वा - मीठा, अल्पसंख्यक बहुसंख्यक, एकतंत्र - बहुतंत्र, अनुराग - विराग - समानार्थी शब्द अथवा पर्यायवाची शब्द: किसी शब्द का समान अर्थ वाले दूसरे शब्द या उसी के समान कोई दूसरा नाम उसे समानार्थी शब्द अथवा पर्यायवाची शब्द कहते है।
उदाहरण: अलंकार- आभूषण, अनादर - तिरस्कर, अंग- अंश, अग्नि- दहन - शब्दयुग्म शब्द: किसी वाक्य में दो या दो से अधिक शब्दों का समूह होता है जो कि साथ में आकार, अर्थ या भाषा के आधार पर मिलकर एक पूर्ण अर्थ दर्शाते हैं।
उदाहरण: शाक - सब्जी, नहाना - धोना, उठना - बैठना, मान - सम्मान - अनेक शब्दों के लिए एक शब्द - हर भाषा में कुछ ऐसे शब्द होते हैं जिनके एक से अधिक अर्थ निकलते हैं। ये अलग-अलग अवसरों में, वाक्यों के साथ मिलकर अलग-अलग अर्थ देते हैं। ये शब्द अनेकार्थी शब्द कहलाते हैं।
उदाहरण:
- औसत - बीच का, साधारण, दरमियानी
- कर्ण - कर्ण (नाम), कान
- कुंभ - घड़ा, एक राशि, हाथी का मस्तक
- भिन्नार्थक शब्द: ऐसे शब्द जो पढ़ने और सुनने में लगभग एक-से लगते हैं, परंतु अर्थ की दृष्टि से भिन्न्न होते हैं, श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द कहलाते हैं। कुछ शब्द ऐसे होते हैं जिनमें स्वर, मात्रा अथवा व्यंजन में थोड़ा-सा अन्तर होता है। वे बोलचाल में लगभग एक जैसे लगते हैं, परन्तु उनके अर्थ में भिन्नता होती है।
उदाहरण:
- कोश - म्यान
कोष - खजाना - खोलना - बन्धनमुक्त करना
खौलना - उबलना
- कोश - म्यान
- कठिन शब्दों के अर्थ: कठिन का तात्पर्य उन सभी चीजों के विपरीत है जो आसान है। कठिन का तात्पर्य उन बाधाओं की उपस्थिति से है जिन्हें पार करना है या पहेलियों को हल करना है और कौशल या साहस की आवश्यकता का सुझाव देता है। कठिन श्रमसाध्य और सतत परिश्रम की आवश्यकता पर बल देता है।
उदाहरण:- क्लिष्ट = जटिल
- यत्किंचित = कुछ; थोड़ा सा; ज़रा सा।
- अट्टालिका = किसी उंच्ची इमारत का ऊपरी कक्ष या हिस्सा।
- विरामचिह्न: वाक्य पढ़ते समय कहाँ रुकना; कितना रुकना, वाक्य का भाव कैसे प्रकट करना इत्यादि बताने के लिए जिन विविध चिहनों का प्रयोग किया जाता है, उन्हें विरामचिह्न कहते हैं।
विरामचिहन निम्नलिखित प्रकार के होते हैं:
- पूर्णविराम (.) - विधानात्मक वाक्य पूर्ण हुआ है यह दिखाने के लिए जिस चिहन का प्रयोग किया जाता है, उसे पूर्णविराम कहते हैं।
उदाहरण:
- उसने बताया नहीं कि वह कहाँ जा रहा है।
- अल्पविराम (,) - वाक्य बोलते समय बीच-बीच में ठहरने के लिए जिस चिह्न का प्रयोग किया जाता है, उसे अल्पविराम कहते हैं।उदाहरण:
- राधे, तुम आज भी विद्यालय नहीं गयीं।
- अर्धविराम (;) - वाक्य में जब ठहराव अल्पविराम से अधिक और पूर्णविराम से कम हो तो अर्धविराम॑ का प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण:
- उसने बताया नहीं कि वह कहाँ जा रहा है।
- प्रश्नवाचक चिहन (?) - प्रश्न पूछने के लिए जिस चिह्न का प्रयोग किया जाता है, उसे प्रश्नवाचक चिह्न कहते हैं।
उदाहरण:
- उसकी पुस्तक किसने ली ?
- राम घर पर आया या नहीं ?
- विस्मयादिबोधक चिह्न (!) - वाक्य में हर्ष, शोक, विस्मय इत्यादि व्यक्त करने के लिए जिस चिह्न का प्रयोग कियां जाता है, उसे विस्मयादिबोधक चिह्न कहते हैं।
उदाहरण:
- हाय ! अब मैं क्या करूँ ?
- अरे ! तुम प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हो गये।
- अवतरण चिह्न (””) - किसी के कहें वाक्य को ज्यों-का-त्यों व्यक्त करने के | लिए जिस चिहन का प्रयोग किया जाता है, उसे अवतरण चिह्न कहते हैं।
- इकहरा अवतरण चिह्न ('') - शीर्षक, पुस्तक, संस्था. का नामनिर्देश करते समय इकहरा अवतरण चिह्न ('') का प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण: रामधारीसिंह ‘दिनकर’ ओज के कवि हैं। - दुहरा अवतरण चिह्न (””) - किसी के कथन को दिखाने के लिए दुहरा अवतरण चिह्न (””) का प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण: महावीर ने कहा, ‘‘अहिंसा परमोधर्मः।’’
- इकहरा अवतरण चिह्न ('') - शीर्षक, पुस्तक, संस्था. का नामनिर्देश करते समय इकहरा अवतरण चिह्न ('') का प्रयोग किया जाता है।
- निर्देशक चिह्न (―) - जहाँ एक शब्द या शब्दों को दूसरे शब्दों से अलग किया जाता है तथा आगे किसी विशेष बात का उल्लेख किया जाता है, वहाँ निर्देशक चिह्न (-) का प्रयोग होता है।
उदाहरण: मनसा ― बेटी,यदि तू जानती। - योजक चिह्न (-) - दो शब्दों को युग्म बनाने के लिए या एक ही शब्द को दो या अधिक बार दुहराने पर योजक चिहन (-) का प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण: माता-पिता, प्रेम-सागर - अपूर्णविराम (:) - संवाद-लेखन, एकांकी-लेखन या नाटक-लेखन में अपूर्णविराम का प्रयोग अधिक किया जाता है।
उदाहरण: छोटा सवाल : बड़ा सवाल
- पूर्णविराम (.) - विधानात्मक वाक्य पूर्ण हुआ है यह दिखाने के लिए जिस चिहन का प्रयोग किया जाता है, उसे पूर्णविराम कहते हैं।
- उपसर्ग पहचानना/अलग करना: वह अव्यय या शब्दांश, जो किसी शब्द के पहले आकर उसका विशेष अर्थ बनाते हैं, उन्हें उपसर्ग कहा जाता है।
उदाहरण:
- प्र+हार = प्रहार
- आ+हार = आहार
- प्रत्यय पहचानना/अलग करना: जो शब्दांश शब्दों के अंत में विशेषता या परिवर्तन ला देते हैं, वे प्रत्यय कहलाते हैं।
उदाहरण:
- लेखक = लेख् + अक
- प्रत्यय = प्रति + अय
- लय-ताल युक्त शब्द:
उदाहरण:
- हवा - रवा
- बावली - साँवली
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‘‘ ’’
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,
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