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शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए - 'अगर ध्यान से देखो ............. और आधा नहीं है' - Hindi (Elective)

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प्रश्न

शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए -

'अगर ध्यान से देखो ............. और आधा नहीं है'

टीपा लिहा

उत्तर

इन पंक्तियों के माध्यम से कवि ने बनारस की विचित्रता को दर्शाया है। उसे यहाँ जब कुछ पूर्ण नहीं दिखाई देता। वह आधा बोलकर इस अधूरेपन को व्यक्त करता है। प्रतीकात्कता का भाव विद्यमान है तथा अनुप्रास अलंकार की छटा भी बिखरी हुई है। आधा शब्द पंक्तियों में चमत्कार उत्पन्न करता है।

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बनारस
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 1.04: केदारनाथ सिंह (बनारस, दिशा) - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ २६]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi - Antara Class 12
पाठ 1.04 केदारनाथ सिंह (बनारस, दिशा)
प्रश्न-अभ्यास | Q 8. (ख) | पृष्ठ २६

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शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए -

'यह धीरे-धीरे होना ............ समूचे शहर को'


शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए -
'अपनी एक टाँग पर ............. बेखबर'


आप बनारस के बारे में क्या जानते हैं? लिखिए।


बनारस के चित्र इकट्ठे कीजिए।


बनारस शहर की विशेषताएँ जानिए।


निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प का चयन कीजिए -

जो है वह खड़ा है
बिना किसी स्तंभ के
जो नहीं है उसे थामे है
राख और रौशनी के ऊँचे ऊँचे स्तंभ
आग के स्तंभ
और पानी के स्तंभ
धूएँ के
खुशबू के
आदमी के उठे हुए हाथों के स्तंभ

किसी अलक्षित सूर्य को
देता हुआ अर्घ्य
शताब्दियों से इसी तरह
गंगा के जल में
अपनी एक टांग पर खड़ा है यह शहर
अपनी दूसरी टांग से
बिल्कुल बेखबर!

(क) जो है वह खडा है बिना किसी स्तंभ के.......' वह जो बिना सहारे के खड़ी है -   (1)

  1. दार्शनिकता
  2. आध्यात्मिकता
  3. धुएं की विशालता
  4. पानी की पवित्रता

(ख) 'अपनी दूसरी टांग से बिल्कुल बेखबर' पंक्ति का आशय है कि -  (1)

  1. अध्यात्मिकता से अनभिज्ञ होना
  2. आधुनिकता से अनभिज्ञ होना
  3. सांसारिकता से अनभिज्ञ होना
  4. दार्शनिकता से अनभिज्ञ होना

(ग) राख के स्तंभ से क्या अभिप्राय है?   (1)

  1. पूजा-पाठ की सामग्री के ढेर से
  2. शवों के राख के ढेर से
  3. मिट्टी के ढेर से
  4. मुरझाए फूलों के ढेर से

(घ) आस्था, विरक्ति, विश्वास, आश्चर्य और भक्ति का मिला-जुला रूप दिखाई देता है -    (1)

  1. श्रद्धा और अंधभक्ति में
  2. मोक्ष की अवधारणा में
  3. मिथकीय आस्था में
  4. बनारस की आध्यात्मिकता में

(ङ) मनुष्य के हाथ स्तंभ की भांति खड़े हो जाते हैं -    (1)

  1. मंदिर की ध्वजा को प्रमाण करने के लिए
  2. अदृश्य को अर्घ्य देने के लिए
  3. किसी की मदद के लिए
  4. श्रेष्ठता सिद्ध करने के लिए

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