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शीतलयुद्ध से हथियारों की होड़ और हथियारों पर नियंत्रण - ये दोनों ही प्रक्रियाएँ पैदा हुई। इन दोनों प्रक्रियाओं के क्या कारण थे? - Political Science (राजनीति विज्ञान)

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प्रश्न

शीतलयुद्ध से हथियारों की होड़ और हथियारों पर नियंत्रण - ये दोनों ही प्रक्रियाएँ पैदा हुई। इन दोनों प्रक्रियाओं के क्या कारण थे?

दीर्घउत्तर

उत्तर

  1. शीतलयुद्ध के कारण हथियारों की होड़ - दूसरे विश्वयुद्ध की समाप्ति से ही शीतलयुद्ध की शुरुआत हो गई थी। अमरीका ने जापान के खिलाफ दो परमाणु बमों का प्रयोग किया। अमरीका द्वारा परमाणु बमों के अविष्कार ने अमरीका इस भावना का विकास किया की अब वह विश्व की सबसे बड़ी शक्ति है। परन्तु अमरीका का परमाणु शक्ति ने सोवियत संघ को शांत रखने के बजाये उसे परमाणु बम बनाने के लिए प्रेरित किया और उसने भी जल्द ही इसे बनाने में सफलता पाई। अब ये दोनों महाशक्तियां परमाणु बम संपन्न हो चुके थे। दोनों महाशक्तियो ने अपने परिक्षणो को और तेज किया तथा अधिक - से - अधिक विनाशकारी हथियार बनाने और परमाणु परिक्षण करने आरंभ कर दिए। इसने दुनिया के भिन्न - भिन्न देशों में भय, आतंक और असुरक्षा की भावना पैदा की और विश्व का वातावरण तनावपूर्ण होता गया। छोटे - छोटे राष्ट्रों ने भी इन महाशक्तियों से नए - नए तथा घातक हथियार लेने आरंभ कर दिए और अपनी सेनाओं को उनसे सुसज्जित करने का प्रयास किया। दोनों महासक्तियाँ अपने गठबंधन के सदस्यों को सैनिक हथियारों से युक्त करने लगी की जाने कब इसका प्रयोग करना पड़े। शीतलयुद्ध के दौरान कई ऐसे अवसर आये जबकि दोनों शक्तियों के बीच सशस्त्र युद्ध हो सकता था और ऐसे समय में हथियारों का प्रयोग किया जा सकता था। इस प्रकार हथियारों की होड़ उस प्रक्रिया को कहा जाता है जिसमे छोटे - बड़े सभी राष्ट्र अपनी सुरक्षा हेतु नए - नए तथा विश्वंसकारी हथियार बनाने और उसका जखीरा करने में लगे हुए थे। महाशक्तियों की स्पर्धा के साथ साथ कई क्षेत्रों में भी बहुत से देश अपने पड़ोसी देशों के साथ स्पर्धा में लीन थे और अपने को पड़ोसी देश से अधिक अच्छे तथा विनाशकारी हथियारो से सुसज्जित करना चाहते थे। कोई भी देश यह नहीं चाहता था की उसके सैनिक शक्ति कम मात्रा में हो क्योंकि विश्व की राजनिति में किसी देश की स्थिति का माप - तोल उसके सैनिक शक्ति के आधार पर भी किया जा रहा है। इस प्रकार शीतलयुद्ध के कारण हथियारों की होड़ शुरू हो गई थी।
  2. शीलयुद्ध के कारण हथियारों पर नियंत्रण - शीतयुद्ध ने विश्व के नेताओ को नि:शस्त्रीकरण के लिए भी प्रेरित किया। बेशक दोनों ही गुट नए - नए विध्वंसकारी हथियार बनाने और अणु परीक्षण करने पर जोर देते थे और अपने सहयोगी देशो को अधिक - से - अधिक सैनिक सहायता देते थे तो भी ये जानते थे की यदि युद्ध चीड़ गया तो उसके बड़े भयंकर परिणाम निकलेंगे। दोनों ही गुट युद्ध में अपनी जीत के लिए आश्वस्त नहीं थे। यह भी जानते थे की यदि कभी धमकी देने और अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने में ही किसी अणु बम का विस्फोट हो गया तो इससे समस्त मानव जाति के लिए बुरे परिणाम निकलेंगे। दोनों ही गुट बातचीत के दौरान संयम बरतते थे। कभी एक गुट संयम का प्रयोग करके पीछे हट जाता था तो कभी दूसरा। ये यह भी जानते थे की संयम की भी एक सीमा होती है और यदि कभी कोई इस सीमा बाहर निकल गया और युद्ध हो गया तो दोनों गुट ही धराशायी होगें। अतः सभी नेताओं को विश्वास था की विश्वशांति की स्थापना और विकास हथियारों की दौड़ नहीं, हथियारों पर नियंत्रण करने से संभव है। हथियारों के आवश्यकता से अधिक निर्माण और उनके रखने, अंधाधुंध तरीके से अणु परिक्षण करने पर जब तक नियंत्रण नहीं लगता विश्व में स्थाई शांति और सुरक्षा की प्राप्ति नहीं हो सकती। दोनों ही गुट लगातार इस बात को समझते थे की कोई भी पक्ष दूसरे के हथियारों की विश्व और उनकी क्षमता के बारे में गलत अनुमान लगा सकता है, दोनों एक - दूसरे की मंशा को समझने में भूल कर सकते हैं। यह भी संभावना थी की किसी भी समय परमाणु दुर्धटना हो सकती है, परमाणु परिक्षण के दौरान गलती हो सकती है, हथियारों की खेप असामाजिक तत्वों के हाथो लग सकती है तो ऐसी स्थिति में भी विनाश का होना निश्चित है। इस प्रकार शीतयुद्ध के कारण, १९६० के दशक के उत्तरार्ध में हथियारों पर नियंत्रण लगाए जाने की प्रकिया आरंभ हुई यह प्रक्रिया कोई एकतरफा नहीं थी बल्कि दोनों ही गुट इस नियंत्रण के इच्छुक थे। एक दशक के अंदर ही, निशस्त्रीकरण से संबंधित तीन महत्त्वपूर्ण समझौते हुए। वैसे तो संयुक्त राष्ट्र संघ ने 1946 में एक अणुशक्ति आयोग स्थापित किया था और 1947 में अमरीका तथा सोवियत संघ के प्रस्तावों के आधार पर परंपरागत शस्त्र आयोग भी स्थापित किया था और 1952 में इन दोनों आयोगों के स्थान पर नि:शस्त्रीकरण के संबंध में 1963 में अमरीका, सोवियत संघ और ब्रिटेन के बिच एक परमाणु प्रतिबंध संधि हुई थी। इसी प्रकार शीतलयुद्ध ने नि:शस्त्रीकरण अथवा हथियारो पर नियंत्रण लगाए जाने की प्रक्रिया को भी प्रोत्साहित किया।
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शीतयुद्ध का दौर का परिचय
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पाठ 1: शीतयुद्ध का दौर - प्रश्नावली [पृष्ठ १६]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Political Science [Hindi] Class 12
पाठ 1 शीतयुद्ध का दौर
प्रश्नावली | Q 5. | पृष्ठ १६
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