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प्रश्न
सिंधु सभ्यता के केंद्र में समाज था, राजा या धर्म नहीं ! सिद्ध कीजिए।
उत्तर
इस सभ्यता को लेखक ने साधन-संपन्न माना है। इस सभ्यता ने भव्यता को महत्व नहीं दिया है। एक कलात्मकता को महत्व देती है। अतः हम कह सकते हैं कि यहाँ के लोग बोध कला में रूचि रखते हैं। यहाँ की नगर व्यवस्था, पत्थर तथा धातु से बनी मूर्तियाँ, पशु-पक्षियों की आकृतियाँ, सुंदर मुहरें, खिलौने, बालों को सवारने का कंघा, गहने इत्यादि इसके सौंदर्य बोध का प्रमाण देते हैं। यहाँ पर आपको राजचिन्ह या धर्म से संबंधित चिन्ह नहीं मिलते हैं। यदि मिलते होते तो इसकी स्थिति बिल्कुल अलग होती। यहाँ आम जनता से जुड़े चिन्ह अधिक बिखरे हुए हैं। जिनका सौंदर्य बोध इसी कारण विद्यमान है। यह सभ्यता हर तरह से समाज पोषित सभ्यता को दर्शाती है। यहाँ पर ताकत के चिन्ह नहीं मिलते। यह सभ्यता आपसी समझ के कारण लंबे समय तक चली। यह आडंबर रहित है।
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संबंधित प्रश्न
सिंधु-सभ्यता साधन-सपन्न थी, पर उसमें भव्यता का आडबर नहीं था। कैसे?
“सिंधु-सभ्यता की खूबी उसका सौंदर्य-बोध हैं जो राज-पोषित या धर्म-पोषित न होकर समाज-पोषित था।” ऐसा क्यों कहा गया?
पुरातत्व के किन चिहनों के आधार पर आप यह कह सकते हैं कि-‘सिंधु-सभ्यता ताकत से शासित होने की अपेक्षा समझ से अनुशासित सभ्यता थी?”
‘यह सच है कि यहाँ किसी अगन की टूटी-फूटी सीढ़ियाँ अब आपको कहीं नहीं ले जातीं; वे आकाश की तरफ अधूरी रह जाती हैं। लेकिन उन अधूरे पायदानों पर खड़े होकर अनुभव किया जा सकता है कि आप दुनिया की छत पर हैं, वहाँ से आप इतिहास को नहीं, उसके पार झाँक रह हैं।” इस कथन के पीछ लखक का क्या आशय हैं?
‘टूटे-फूटे खडहर, सभ्यता और सस्कृति के इतिहास के साथ-साथ धड़कती जिंदगियों के अनछुए समयों का भी दस्तावेज होते हैं।”-इस कथन का भाव स्पष्ट कीजिए।
इस पाठ में एक ऐसे स्थान का वर्णन हैं जिसे बहुत कम लोगों ने देखा होगा, परंतु इससे आपके मन में उस नगर की एक तसवीर बनती है। किसी ऐस ऐतिहासिक स्थल, जिसको आपने नजदीक से देखा हो, का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
नदी, कुएँ स्नानागार और बेजोड़ निकासी व्यवस्था को देखते हुए लखक पाठकों स प्रश्न पूछता है कि क्या हम सिंधु घाटी सभ्यता को जल-सस्कृति कह सकते हैं? आपका जवाब लखक के पक्ष में है या विपक्ष में? तक दें।
सिंधु घाटी सभ्यता का कोई लिखित साक्ष्य नहीं मिला है। सिर्फ अवशेषों के आधार पर ही धारणा बनाई गई है। इस लेख में मुअनजो-दड़ो के बारे में जो धारणा व्यक्त की गई है क्या आपके मन में इससे कोई भिन्न धारणा या भाव भी पैदा होता है? इन सभावनाओं पर कक्षा में समूह-चर्चा करें।
मोहनजोदड़ो की सभ्यता को लो-प्रोफाइल सभ्यता क्यों माना गया है?
सिंधु घाटी की सभ्यता के संबंध में कौन-सा कथन सही नहीं है?
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
(I) महाकुंड स्तूप में उत्तर और दक्षिण से सीढ़ियाँ उतरती हैं।
(II) मोहनजोदड़ो सभ्यता में सूत की कताई, बुनाई और रंगाई भी होती थी।
(III) सिंधु घाटी सभ्यता में जल निकासी की व्यवस्था अत्यंत बुरी थी।
(IV) मोहनजोदड़ो से मिला नरेश के सिर का मुकुट बहुत छोटा था।
उपरिलिखित कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?
राखालदास बनर्जी कौन थे?
संसार के प्राचीनतम दो नियोजित शहर किसे माना गया है?
मुअनजो-दड़ो की अनूठी मिसाल क्या है?
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन (I): सिंधु सभ्यता में नगर नियोजन उन्नत नहीं था।
कथन (II): सिंधु घाटी सभ्यता की खूबी सौंदर्य बोध है।
कथन (III): मुअनजो-दड़ो छोटे-मोटे टीलों पर बसा था।
कथन (IV): सिंधु घाटी सभ्यता टीलों पर आबाद थी।
सही कथन/कथनों वाले विकल्प को चयनित कर लिखिए।
निम्नलिखित प्रश्न को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न के लगभग 40 शब्दों में उत्तर दीजिए :-
अजायबघर में रखे सिंधु-सभ्यता के पुरातत्व के अवशेषों से किसका महत्व सिद्ध होता है - कला का या ताकत का? तर्क सहित उत्तर दीजिए।