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संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए-तब तौ छबि पीवत जीवत हे, ______ बिललात महा दुःख दोष भरे। - Hindi (Elective)

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प्रश्न

संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए-
तब तौ छबि पीवत जीवत हे, ______ बिललात महा दुःख दोष भरे।

थोडक्यात उत्तर

उत्तर

प्रसंग- प्रस्तुत पंक्तियाँ अंतरा भाग-2 नामक पुस्तक में संकलित कवित्त से ली गई हैं। इसके रचयिता रीतिकाल के प्रसिद्ध कवि घनानंद है। प्रस्तुत पंक्तियों में कवि संयोग तथा वियोग अवस्थाओं का आपस में तुलनात्मक अध्ययन कर रहा है।
व्याख्या- घनानंद कहते हैं कि जब तक मैं तुम्हारे साथ था, तब तक तुम्हारी छवि देखकर मैं जीवित था। लेकिन जबसे तुमसे अलग हुआ हुँ बहुत व्याकुल हूँ। अपने मिलनकाल के समय की स्थिति का सोचते ही मेरे नयन जलने लगते हैं। अर्थात अपने पुराने समय का सोचकर मुझे बहुत कष्ट होता है। उस समय मेरे हृदय में यही सोचकर संतोष हुआ करता था कि तुम मेरे सामने हो। तुमसे अलग होने के कारण वियोग में तड़पना पड़ रहा है और जिससे मुझे बहुत दुख सहना पड़ रहा है। यह अवस्था मेरे लिए दोष से भरी हुई है। भाव यह है कि जब सुजान कवि के पास थी, तो कवि उसके साथ को पाकर ही संतुष्ट हो जाता था। परन्तु आज उससे अलग हो जाने के कारण उसे महान दुख हो रहा है, जो उसके बहुत कष्टप्रद स्थिति है।

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सवैया
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पाठ 1.11: घनानंद (कवित्त/सवैया) - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ ६८]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi - Antara Class 12
पाठ 1.11 घनानंद (कवित्त/सवैया)
प्रश्न-अभ्यास | Q 8. (ग) | पृष्ठ ६८

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संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए-
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