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प्रश्न
सप्रसङ्गं व्याख्यायन्ताम्-
अनिर्वचनीयमेतत्पट्योः सौन्दर्यम्। अतिसूक्ष्मतरोऽयं पटः। पश्य,एतस्य पञ्चषैः पटलैः परिवेष्टितमप्यपटमेव प्रतीयतेऽङ्गम्।
उत्तर
प्रसंग – प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘भास्वती प्रथमो भागः’ के अध्याय ‘वस्त्रविक्रयः’ में से उद्धृत किया गया है। यह अध्याय महामहोपाध्याय पं० मथुराप्रसाद
दीक्षितकृत ‘भारतविजयनाटकम्’ के प्रथम अंक से संकलित है। प्रस्तुत पाठ में वस्त्र व्यापारियों के साथ जुलाहों का वस्त्र विक्रय हेतु वार्तालाप होता है। उसी समय विदेशी गौराग का प्रवेश होता है। वह राजकीय मुद्रा से अंकित प्रमाणपत्र दिखाकर बहुत कम मूल्य देकर वस्त्र खरीद लेता है और डाँट-डपट कर जुलाहे को वहाँ से जाने को कहता है। वस्त्र बहुत सुन्दर है, अतः उसकी प्रशंसा करता हुआ वह विदेशी गौराङ्ग कहता है
अर्थ – दोनों वस्त्रों की सुन्दरता अवर्णनीय है। यह वस्त्र अत्यन्त महीन है। देखो, इसकी पाँच-छ: परतों से ढका हुआ अंग भी वस्त्रहीन सा दिखाई देता है।
व्याख्या – वस्त्र इतना सुन्दर तथा महीन है कि इसकी पाँच-छ: परतों से भी यदि अंग ढका जाता है तब भी वह अंग वस्त्रहीन सा ही लगता है। इस प्रकार वह विदेशी अत्यन्त प्रसन्न है कि उसने बहुत कम मूल्य में इतना सुन्दर वस्त्र ले लिया है।
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अयं पाठः कस्मात् ग्रन्थात् सङ्कलितः कश्च तस्य प्रणेता?
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अनिर्वचनीयम् ______ सौन्दर्यम्।
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कथमेत्समक्षमस्मद्देशीयानां ______ विक्रयो भविष्यति।
यूयं पटान् निर्माय ______ सविधे विक्रीणीध्वे।
सप्रसङ्गं व्याख्यायन्ताम्-
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सप्रसङ्गं व्याख्यायन्ताम्-
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सन्धिविच्छेदं क्रियताम्-
विंशत्यधिकम् ।
सन्धिविच्छेदं क्रियताम्-
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सन्धिविच्छेदं क्रियताम्-
मोचयिष्याम्यतः।
सन्धिविच्छेदं क्रियताम्-
सामर्षम्।
सन्धिविच्छेदं क्रियताम्-
मिथ्यैतत् ।
‘एतत्सूक्ष्मपटस्येति’ श्लोकस्य स्वमातृभाषया अनुवादः कार्यः-
अधोलिखितेषु पदेषु धातु प्रत्यय च पृथक्कृत्य लिखत-
घातु | प्रत्यय | |
विक्रेतुम् | ______ | ______ |
अनिर्वचनीयम् | ______ | ______ |
विचिन्त्य | ______ | ______ |
गत्वा | ______ | ______ |
निबध्य | ______ | ______ |
निर्माय | ______ | ______ |
अभिलक्ष्य | ______ | ______ |