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प्रश्न
स्पष्ट कीजिए क्यों
काँच के स्वच्छ समतल पृष्ठ पर जल फैलने का प्रयास करता है जबकि पारा उसी पृष्ठ पर बूंदें बनाने का प्रयास करता है। (दूसरे शब्दों में जल काँच को गीला कर देता है जबकि पारा ऐसा नहीं करता है।)
थोडक्यात उत्तर
उत्तर
पारे के अणुओं के बीच ससंजक बल, पारे व काँच के अणुओं के बीच आसंजक बल से अधिक होता है, इस कारण काँच व पारे का स्पर्श कोण अधिक कोण होता है। इसके विपरीत जल के अणुओं के बीच ससंजक बल, काँच व जल के अणुओं के बीच आसंजक बल से कम होता है, इस कारण जल तथा काँच के बीच स्पर्श कोण न्यूनकोण होता है।
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दाब - दाब का परिचय
या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 10: तरलों के यांत्रिक गुण - अभ्यास [पृष्ठ २८२]