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प्रश्न
उत्तर
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संबंधित प्रश्न
बाज़ार का जादू चढ़ने और उतरने पर मनुष्य पर क्या-क्या असर पड़ता है?
'बाज़ारूपन' से क्या तात्पर्य है? किस प्रकार के व्यक्ति बाज़ार को सार्थकता प्रदान करते हैं अथवा बाज़ार की सार्थकता किसमें है?
आप अपने तथा समाज से कुछ ऐसे प्रसंग का उल्लेख करें-
जब पैसा शक्ति के परिचायक के रूप में प्रतीत हुआ।
आप अपने तथा समाज से कुछ ऐसे प्रसंग का उल्लेख करें-
जब पैसे की शक्ति काम नहीं आई।
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मन खाली हो
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मन खाली न हो
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मन बंद हो
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मन में नकार हो
बाज़ार दर्शन पाठ में किस प्रकार के ग्राहकों की बात हुई है? आप स्वयं को किस श्रेणी का ग्राहक मानते/मानती हैं?
लेखक ने पाठ में संकेत किया है कि कभी-कभी बाज़ार में आवश्यकता ही शोषण का रूप धारण कर लेती है। क्या आप इस विचार से सहमत हैं? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
पर अँगूंती कबूल नहीं र्का । काली दाहीं के बीच पीले दाँतों‘
की हँसी” हँसते हुए बोला ” मैं कोइ राजा नहीं हुँ जो न्याय
की कीमत वसूल करू। मैंने तो अटका काम निकाल
दिया । आँर यह अँगूठी मेरे किस काम ! न यह
अँगुलियों में आती हैं, न तड़े यें। मरी भेड़े‘ भी मेरी तरह
गाँवार हँ‘। घास तो खाती हैं, पर सोना सूँघती तक नहाँ।
बेकार र्का वस्तुएँ तुम अमरों को ही शोभा देती हैं।”
प्रेमचंद की कहानी ईदगाह के हामिद और उसके दोस्तों का बाज़ार से क्या संबंध बनता है? विचार करें।
नीचे दिए गए वाक्यों को पढ़िए।
- पैसा पावर है।
- पैसे की उस पर्चेज़िंग पावर के प्रयोग में ही पावर का रस है।
- मित्र ने सामने मनीबैग फैला दिया।
- पेशगी ऑर्डर कोई नहीं लेते।
पर्चेंज़िंग पावर से क्या अभिप्राय है?
बाज़ार की चकाचौंध से दूर पर्चेज़िंग पावर का साकारात्मक उपयोग किस प्रकार किया जा सकता है? आपकी मदद क लिए संकेत दिया जा रहा है-
- सामाजिक विकास के कार्यों में।
- ग्रामीण आर्थिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने में ______।
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए:
मैंने मन में कहा, ठीक। बाज़ार आमंत्रित करता है कि आओ मुझे लूटो और लूटो। सब भूल जाओ, मुझे देखो। मेरा रूप और किसके लिए है? मैं तुम्हारे लिए हूँ। नहीं कुछ चाहते हो, तो भी देखने में क्या हरज़ है। अजी आओ भी। इस आमंत्रण में यह खूबी है कि आग्रह नहीं है आग्रह तिरस्कार जगाता है। लेकिन ऊँचे बाज़ार का आमंत्रण मूक होता है और उससे चाह जगती है। चाह मतलब अभाव। चौक बाज़ार में खड़े होकर आदमी को लगने लगता है कि उसके अपने पास काफ़ी नहीं है और चाहिए, और चाहिए। मेरे यहाँ कितना परिमित है और यहाँ कितना अतुलित है ओह! कोई अपने को न जाने तो बाज़ार का यह चौक उसे कामना से विकल बना छोड़े। विकल क्यों, पागल। असंतोष, तृष्णा और ईर्ष्या से घायल कर मनुष्य को सदा के लिए यह बेकार बना डाल सकता है। |
- गद्यांश में प्रयुक्त 'अतुलित' शब्द का समानार्थी शब्द हो सकता है? 1
- अरिहंत
- अथाह
- अभाव
- अक्षय
- गद्यांश का केंद्रीय भाव है? 1
- बाज़ार के प्रकार बताना
- बाज़ार न जाने की सलाह
- मनुष्य की तृष्णा को इंगित करना
- मनुष्य पर बाज़ार के जादू का असर
- निम्नलिखित कथनों पर विचार करते हुए गद्यांश के अनुसार सही कथन को चयनित कर लिखिए। 1
- जब मनुष्य बैचैन हो जाता है तब वह बाज़ार की ओर उन्मुख हो जाता है।
- जब मनुष्य तुलना करने लगता है तब असंतोष, तृष्णा और ईर्ष्या के भाव मनुष्य में उभरते हैं।
- जब मनुष्य को बाज़ार आमंत्रित करता है तब मनुष्य की व्याकुलता इसका कारण होती है।
- जब मनुष्य बाज़ार का तिरस्कार करता है तब वह इसका सही लाभ ले पाता है।
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कॉलम 1 को कॉलम 2 से सुमेलित कीजिए और सही विकल्प चुनकर लिखिए। 1
कॉलम 1 कॉलम 2 1 आग्रह का तिरस्कार जागता (i) मौन रहकर कार्य करना 2 बड़े बाज़ार का जादू (ii) अपनी तृष्णा को रोकना 3 बाज़ार के जादू से बचने का उपाय (iii) इच्छा पूर्ण ना होना - 1-(iii), 2-(i), 3-(ii)
- 1-(i), 2-(iii), 3-(ii)
- 1-(i), 2-(ii), 3-(iii)
- 1-(ii), 2-(i), 3-(iii)
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बाज़ार का आमंत्रण कि, 'आओ मुझे लूटो' से क्या आशय है? 1
- बाज़ार लुट जाना चाहता है।
- बाज़ार के पास वस्तुएँ बहुत ज्यादा हैं।
- बाज़ार केवल खुद का रूप दिखाना चाहता है।
- बाज़ार आकर्षित करना चाह रहा है।
निम्नलिखित प्रश्न को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न के लगभग 40 शब्दों में उत्तर दीजिए :-
जिन्हें अपनी ज़रूरत का पता नहीं होता, वे लोग बाज़ार का बाज़ारूपन कैसे बढ़ाते हैं?