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सूचकांक का क्या महत्व है। सूचकांक को परिकलन को प्रक्रिया को बताने के लिए एक उदाहरण लीजिए और परिवर्तनों को दिखाइए। - Geography (भूगोल)

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प्रश्न

सूचकांक का क्या महत्व है। सूचकांक को परिकलन को प्रक्रिया को बताने के लिए एक उदाहरण लीजिए और परिवर्तनों को दिखाइए।

दीर्घउत्तर

उत्तर

सूचकांक एक सांख्यिकीय माप है जिसका उपयोग समय के संदर्भ में विभिन्न चरों में हुए परिवर्तनों को उनकी भौगोलिक स्थिति तथा दूसरी विशेषताओं के आधार पर, मापने के लिए परिकलित किया जाता है। स्मरण रहे कि सूचकांक न केवल समय के साथ हुए परिवर्तनों की माप करता है बल्कि विभिन्न स्थानों, नगरों, देशों में हो रहे विभिन्न क्रियाकलापों, जनसंख्या संबंधि परिवर्तनों, व्यवसायिक गतिविधियों में हो रहे विकास व वृद्धि का तुलनात्मक विवरण प्रस्तुत करता है। इसलिए सूचकांक का व्यापक उपयोग अर्थशास्त्र, व्यवसाय में लागत व मात्रा में आए परिवर्तनों को देखने के लिए होता है। सूचकांक परिकलन की विभिन्न विधियों में साधारण समुच्च विधि सबसे अधिक उपयोग में लाई जाती है। इसे निम्नलिखित सूत्र से ज्ञात करते हैं।

`"q_1"/"q_°"`
∑q1 = वर्तमान वर्ष के चारो उत्पादक का योग

∑q° = आधार वर्ष के चारो उत्पादक का योग है

साधारणतया आधार वर्ष का मूल्य 100 के बराबर माना जाता है और उसी के आधार पर सूचकांक की गणना की जाती है। जैसे – दी गई सारणी में आधार वर्ष 1980-81 को माना गया है।
सारणी-भारत में लौह अयस्क के उत्पादन में हुए परिवर्तन को दर्शाया गया है।

वर्ष उत्पादन परिकलन सूचकांक
1980 - 81 42.2 `"42.2"/"42.2"xx100` 100
1990-91 53.7 `"53.7"/"42.2"xx100` 127
2000-01 67.4 `"67.4"/"32.5"xx100` 160

स्रोत – भारत-आर्थिक सर्वेक्षण, 2005

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आंकड़ों का संग्रह और प्रस्तुतीकरण
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पाठ 1: आंकड़े : स्रोत और संकलन - अभ्यास [पृष्ठ १२]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Practical Work in Geography [Hindi] Class 12
पाठ 1 आंकड़े : स्रोत और संकलन
अभ्यास | Q 3. (ii) | पृष्ठ १२
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