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प्रश्न
निम्नलिखित पठित परिच्छेद पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसारकृतियाँ कीजिए:
तुम अपनी सहेली रचना को यह समझाओ कि क्रांति की बड़ी-बड़ी बातें करना आसान है, कोई छोटी-सी क्रांति भी कर दिखाना कठिन है और एक ही झटके में यूँ टूट-हारकर बैठ जाना तो निहायत मूर्खता है। फिर अभी तो वह प्रथम वर्ष के पूर्वार्ध में ही है। अभी से उसे ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए। जरूरी हो तो सोच-समझकर वे अपनी दोस्ती को आगे बढ़ा सकते हैं। कॉलेज जीवन की पूरी अवधि में वे निकट मित्रों की तरह रहकर एक-दूसरे को देखें-जानें, जाँचें-परखें। एक-दूसरे की राह का रोड़ा नहीं, प्रेरणा और ताकत बनकर परस्पर विकास में सहभागी बनें। फिर अपनी पढ़ाई की समाप्ति पर भी यदि वे एक-दूसरे के साथ पूर्ववत लगाव महसूस करें, उन्हें लगे कि निकट रहकर सामने आईं कमियों-गलतियों ने भी उनकी दोस्ती में कोई दरार नहीं डाली है, तो वे एक-दूसरे को उनकी समस्त खूबियों-कमियों के साथ स्वीकार कर अपना लें। उस स्थिति में की गई यह कथित क्रांति न कठिन होगी, न असफल। मेरी राय में रचना को और उसके दोस्त को तब तक धैर्य से प्रतीक्षा करनी चाहिए। इस बीच वे पूरे जतन के साथ एक-दूसरे के लिए स्वयं को तैयार करें। बिना तैयारी के जल्दबाजी में, पढ़ाई के बीच शादी का निर्णय लेना केवल बेवकूफी ही कही जा सकती है, क्रांति नहीं। ऐसी कथित क्रांति का असफल होना निश्चित ही समझना चाहिए। इतनी जल्दबाजी में तो किसी छोटे-से काम के लिए उठाया कोई छोटा कदम भी शायद ही सफल हो। यह तो जिंदगी का अहम फैसला है। |
1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए: (2)
- कठिन क्या है ?
- एक ही झटके में यूँ टूट-हारकर बैठ जाना क्या है ?
- एक-दूसरे को वे कब निकट मित्रों की तरह रहकर देखे जाँचे परखे?
- बिना तैयारी के जल्दबाजी में शादी का निर्णय क्या कहा जाता है?
2. निम्नलिखित शब्दों के लिंग पहचानकर लिखिए: (2)
- क्रांति
- हस्तक्षेप
- प्रेरणा
- लगाव
3. निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर 40 से 50 शब्दों में लिखिए। (2)
विद्यार्थी जीवन में मित्रता का 'महत्त्व' इस विषय पर अपना मत व्यक्त कीजिए।
उत्तर
1.
- छोटी-सी क्रांति भी कर दिखाना कठिन है।
- एक ही झटके में यूँ टूट-हारकर बैठ जाना तो निहायत मूर्खता है।
- कॉलेज-जीवन की पूरी अवधि में वे निकट मित्रों की तरह रहकर देखें, जाँचे परखें।
- बिना तैयारी के जल्दबाजी में शादी का निर्णय बेबकूफी कही जाती है।
2.
- क्रांति - स्त्रीलिंग
- हस्तक्षेप - पुल्लिंग
- प्रेरणा - स्त्रीलिंग
- लगाव - पुल्लिंग
3. विद्यार्थी जीवन स्वतंत्र जीवन होता है। यह ऐसा महत्त्वपूर्ण समय होता है, जिसमें विद्यार्थी चाहे तो अच्छा इनसान बन सकता है और बिगड़ना चाहे तो बिगड़ सकता है। यह ऐसी अवस्था है, जब एक युवा या युवती के विकास में उसके संगी साथियों का बहुत अधिक प्रभाव होता है। यदि इस समय अच्छे विद्यार्थियों से मित्रता होगी, तो वह भविष्य में अच्छा ही रहेगा और यदि उसकी संगति बुरे विद्यार्थियों से होगी तो उस पर भी बुरी संगत का असर होगा और वह भी अपने लक्ष्य से भटक जाएगा। सच्चा मित्र हमारे सुख-दुख में सदैव हमारा साथ देता है। हमारी उलझनों, परेशानियों को दूर करने में हमारी सहायता करता है।