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प्रश्न
निम्नलिखित पठित परिच्छेद पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
कुछ दिनों के बाद मेरे पिता जी नाना के ही गाँव में आकर बस गए। अब हम लोगों का गाँव नाना का गाँव ही है। इसलिए मौसी से संबंध कुछ अधिक ही गाढ़ा है। मेरी पढ़ाई-लिखाई में भी मौसी का ही योगदान है। मौसी का बेटा दिलीप हमसे आठ बरस छोटा था। वह अपने माँ-बाप की इकलौती संतान था। वह पढ़ने में मौसा की तरह ही काफी प्रतिभावान था। मैं पढ़-लिखकर नौकरी करने लगा। मौसी से भेंट-मुलाकात कम हो गई। दिलीप का एडमिशन जब एम्स में हुआ था तो मौसा की पोस्टिंग दिल्ली में ही थी। उसने मेडिकल की पढ़ाई भी पूरे ऐश-ओ-आराम के साथ की थी। आगे की पढ़ाई के लिए वह लंदन चला गया। एक बार जो वह लंदन गया तो वहीं का होकर रह गया। जब तक विवाह नहीं हुआ था तब तक तो आना-जाना प्राय: लगा रहता था। विवाह के बाद उसकी व्यस्तता बढ़ती गई तो आना-जाना भी कम हो गया। मौसी भी कभी-कभी लंदन आती-जाती रहती थीं। मौसी जब कभी अपनी ससुराल आती थीं तो नैहर भी अवश्य आती थीं। एक बार गाँव में अकाल पड़ा था। वह अकाल दूसरे वर्ष भी दुहरा गया। पूरे इलाके में हाहाकार मचा था। मौसी उन लाेगों की हालत देखकर द्रवित हो गईं। उसने अपनी ससुराल से सारा जमा अन्न मँगवाया और बाजार से भी आवश्यकतानुसार क्रय करवाया। तीसरे ही दिन से भंडारा खुल गया। मौसी अपने गाँव की ही नहीं बल्कि पूरे इलाके की आदर्श बेटी बन गई थीं। मैं बर्लिन में ही था कि यहाँ बहुत कुछ घट गया। जीवन के सभी समीकरण उलट-पुलट गए। मौसा अचानक हृदय गति रुक जाने के कारण चल बसे। मौसी का जीवन एकाएक ठहर-सा गया। मौसा का अंतिम संस्कार दिलीप के आने के बाद संपन्न हुआ था। मौसा का श्राद्ध उनके गाँव में जाकर संपन्न किया गया। वे लोग जब गाँव से वापस आए तो दिलीप का रंग-ढंग बदला हुआ था। वह पहले मौसा की पेंशन मौसी के नाम से ट्रांसफर करवाने और लंदन ले जाने के लिए वीज़ा बनवाने के काम में लग गया। उसी के बहाने उसने मौसी से कई कागजातों पर हस्ताक्षर करवा लिए। मौसी उसके कहे अनुसार बिना देखे-सुने हस्ताक्षर करती रहीं। उसे भला अपने ही बेटे पर संदेह करने का कोई कारण भी तो नहीं था। जब तक वह कुछ समझ पातीं; उसका जमीन, मकान सब हाथ से निकल चुका था। दिलीप ने धोखे से उस मकान का सौदा आठ करोड़ रुपये में कर दिया था। मौसी को जब इसका पता चला तो उसने एक बार विरोध तो किया परंतु दिलीप ने यह कहकर चुप करा दिया, ‘जब तुम भी मेरे साथ लंदन में ही रहोगी तो फिर यहाँ इतनी बड़ी संपत्ति रखने का कोई औचित्य नहीं है।’ |
1. संजाल पूर्ण कीजिए: (2)
2. उपर्युक्त परिच्छेद से शब्द चुनकर उनमें प्रत्यय लगाकर नए शब्द बनाइए: (2)
- साहस + इक - ______
- रंग + ईन - ______
- संबंध + इत - ______
- संदेह + पूर्ण - ______
3. निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर 40 से 50 शब्दों में लिखिए। (2)
'वृद्धाश्रम: घटते जीवन मूल्यों का प्रतीक' इस विषय पर अपना विचार स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
1.
2.
- साहस + इक - साहसिक
- रंग + ईन - रंगीन
- संबंध + इत - संबंधित
- संदेह + पूर्ण - संदेहपूर्ण
3. जिस भारतीय संस्कृति में माता-पिता को भगवान का दर्जा दिया जाता था, आज वहीं गली-गली में वृद्धाश्रम खुल गए हैं। आज का युवा स्वार्थी बनकर रह गया है। स्व के अलावा उसे कुछ दिखाई ही नहीं देता। नई पीढ़ी अपने नैतिक मूल्यों को भूलती जा रही है। जिन माता-पिता ने हमारा हाथ थाम हमें चलना सिखाया, कंधे पर बिठाकर दुनिया दिखाई, जरा कदम लड़खड़ाए झट आगे बढ़कर थाम लिया। उनके हाथ-पाँव जब डगमगाने लगे, तो उन्हें सहारा देने के स्थान पर उनसे मुख मोड़ लेते हैं। संपत्ति के लिए माता-पिता तक को नोटिस दे देते हैं। एक बार माता-पिता की संपत्ति हाथ लग जाए तो अपने जन्मदाता ही बोझ स्वरूप लगने लगते हैं। ऐसे पुत्र वास्तव में कृतघ्नी होते हैं। उनके लिए हमारा करिअर, हमारी उन्नति, हमारे बच्चे, इसके अलावा हमारा कोई नहीं। अपनेपन की भावना जाने कहाँ लुप्त हो गई है। नैतिक मूल्य निरंतर घटते जा रहे हैं। बुजुर्ग हमारी धरोहर हैं, अनुभवों का चलता फिरता संग्रहालय हैं। हमें उन्हें आदरपूर्वक सँभालना चाहिए।