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टुन्नू का गायन सुनकर खोजवाँ वालों की सोच और दुलारी के व्यवहार में क्या अंतर आया? - Hindi Course - A

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प्रश्न

टुन्नू का गायन सुनकर खोजवाँ वालों की सोच और दुलारी के व्यवहार में क्या अंतर आया?

टीपा लिहा

उत्तर

खोजवाँ बाजार में आयोजित कजली दंगल में जब साधारण गाना हो गया तो सवाल-जवाब के लिए दुक्कड़ की आवाज़ सुनाई दी। उधर विपक्ष से एक युवा गायक गौनहारिनों में सबसे आगे खड़ी दुलारी की ओर हाथ उठाकर ललकार उठा. “रनियाँ लऽ परमेसरी लोट!” मधुर कंठ से निकले इस गीत को सुनकर खोजवाँ वालों ने सोचा कि अब उनकी विजय तय नहीं है। उधर तनिक-सी बात में नाराज़ हो जाने वाली दुलारी टुन्नू का गीत सुनकर अपने स्वभाव के विपरीत मुसकरा रही थी और मुग्ध होकर गीत सुन रही थी।

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एही ठैयाँ झुलनी हैरानी हो रामा!
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पाठ 4: एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा! - अतिरिक्त प्रश्न

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi - Kritika Part 2 Class 10
पाठ 4 एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!
अतिरिक्त प्रश्न | Q 7

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