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“उहाँ राम लछिमनहि निहारी। बोले बचन मनुज अनुसारी" तुलसीदास द्वारा रचित उपर्युक्त पंक्तियों का भाव स्पष्ट करते हुए अपने विचार व्यक्त कीजिए। - Hindi (Core)

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प्रश्न

“उहाँ राम लछिमनहि निहारी। बोले बचन मनुज अनुसारी"

तुलसीदास द्वारा रचित उपर्युक्त पंक्तियों का भाव स्पष्ट करते हुए अपने विचार व्यक्त कीजिए।

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उत्तर

प्रस्तुत पंक्तियों में लक्ष्मण के मूर्छित होने के बाद राम की व्याकुलता का मार्मिक चित्रण किया गया है। आधी रात बीत जाने पर भी हनुमान के न लौटने पर राम व्यथित हो लक्ष्मण को गले लगा लेते हैं। वे लक्ष्मण के प्रति उनके निःस्वार्थ प्रेम को याद कर भावुक हो जाते हैं।

तुलसीदास जी ने इन पंक्तियों में दर्शाया है कि एक भाई के बिना दूसरे भाई का अस्तित्व अधूरा है। बड़े भाई का अपने छोटे भाई के प्रति असीम और गहरा प्रेम इन पंक्तियों में स्पष्ट झलकता है।

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2021-2022 (April) Term 2 - Delhi Set 1
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