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उपनिवेशवाद के आने के पश्चात् भारतीय अर्थव्यवस्था किन अर्थों में बदली? - Sociology (समाजशास्त्र)

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प्रश्न

उपनिवेशवाद के आने के पश्चात् भारतीय अर्थव्यवस्था किन अर्थों में बदली?

दीर्घउत्तर

उत्तर

उपनिवेशवाद के आगमन के साथ ही भारतीय अर्थव्यवस्था में गहरे बदलाव आए। उत्पादन, व्यापार और कृषि का विघटन हुआ। ब्रिटेन के बने सस्ते कपड़ों ने भारतीय हथकरघा उद्योग को समाप्त कर दिया तथा बुनकर बेकार हो गए।

उपनिवेशकाल में भारत विश्व की पूँजीवादी अर्थव्यवस्था से और अधिक जुड़ गया। अंग्रेजों के द्वारा उपनिवेश बनाए जाने के पूर्व भारत बने-बनाए सामानों के निर्यात का एक प्रमुख केंद्र था। उपनिवेशवाद के बाद भारत कच्चे माल और कृषक उत्पादों का स्रोत और उत्पादिक सामानों का उपभोक्ता बना दिया गया। यह दोनों कार्य ब्रिटेन के उद्योगों को लाभ पहुँचाने के लिए किए गए। पंरतु पहले से विद्यमान आर्थिक संस्थाओं को पूरी तरह से नष्ट करने के बजाय भारत में बाजार अर्थव्यवस्था के विस्तार में कुछ व्यापारिक समुदायों के लिए नए अवसर प्रदान किए गए, जिन्होंने बदली हुई आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार अपने आपको पुनर्गठित किया और अपनी स्थिति को सुधारा। कुछ मामलों में, उपनिवेश द्वारा प्रदान किए गए आर्थिक सुअवसरों का लाभ उठाने के लिए नए समुदायों का जन्म हुआ।

इस प्रकार का सबसे अच्छा उदाहरण मारवाड़ी हैं, जो संभवतः भारत के हर हिस्से में हैं तथा जाना-माना व्यापारिक समुदाय हैं।

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बाजार और अर्थव्यवस्था का समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य
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पाठ 4: बाज़ार एक सामाजिक संस्था के रूप में - प्रश्नावली [पृष्ठ ८२]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Sociology [Hindi] Class 12
पाठ 4 बाज़ार एक सामाजिक संस्था के रूप में
प्रश्नावली | Q 5. | पृष्ठ ८२
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