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प्रश्न
उपसहसंयोजन सत्ता में d कक्षकों का वास्तविक विन्यास Δ0 के मान के आधार पर कैसे निर्धारित किया जाता है?
लघु उत्तर
उत्तर
- यदि Δ0 < P, हो तो चौथा इलेक्ट्रॉन किसी एक eg कक्षक में जायेगा तथा अभिविन्यास \[\ce{t^3_{2g}e^1_g}\] प्राप्त होगा। लिगन्ड जिनके लिए Δ0 < P होता है, दुर्बल क्षेत्र लिगन्ड कहलाते हैं और ये उच्च प्रक्रण (high spin) संकुल बनाते हैं।
- यदि Δ0 > P हो तो, यह ऊर्जा की दृष्टि से अधिक अनुकूल होता है, अत: चौथा इलेक्ट्रॉन किसी एक t2g कक्षक में जाएगा जिससे इलेक्ट्रॉनिक विन्यास \[\ce{t^4_{2g}e^0_g}\] प्राप्त होगा। लिगन्ड जो इस प्रकार का प्रभाव उत्पन्न करते हैं प्रबल क्षेत्र लिगन्ड (strong field ligands) कहलाते हैं तथा ये निम्न प्रचक्रण संकुल बनाते हैं।
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उपसहसंयोजन यौगिकों में आंबधन - क्रिष्टल क्षेत्र सिध्दांत
या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
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