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उत्तर प्रदेश के कुछ भागों में (अब उत्तराखंड) 1970 के दशक में किन कारणों से चिपको आंदोलन का जन्म हुआ? इस आंदोलन का क्या प्रभाव पड़ा? - Political Science (राजनीति विज्ञान)

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प्रश्न

उत्तर प्रदेश के कुछ भागों में (अब उत्तराखंड) 1970 के दशक में किन कारणों से चिपको आंदोलन का जन्म हुआ? इस आंदोलन का क्या प्रभाव पड़ा?

दीर्घउत्तर

उत्तर

चिपको आंदोलन - 'चिपको आंदोलन' बड़ा अजीब सा नाम लगता है। साधारणत: चिपके रहने शब्द का प्रयोग कुर्सी से चिपके रहने वाले नेताओं के लिए किया जाता है। परन्तु यह आंदोलन पेड़ों से चिपके रहने का आह्वान किये जाने के लिए किया गया था। इसका आरंभ उत्तर प्रदेश के एक - दो गॉवो (अब ये गाँव उत्तरखंड में हैं) से आरंभ हुआ था और शीघ्र ही यह सारे देश में प्रसिद्द हो गया और जंगलों की अंधाधुंध कटाई का विरोध करने वाला आंदोलन कहलाया। इस आंदोलन के अंतर्गत गाँवो के लोगों ने जंगलों की व्यावसायिक कटाई का सामूहिक विरोध किया था। ऐसे हुआ की गाँव के लोगों ने अपनी खेती - बड़ी में प्रयोग किए जाने वाले हथियारों को बनाने के लिए वन विभाग से ऐश ट्री काटने की इजाजत माँगी। परन्तु वन विभाग ने उन्हें इसकी स्वीकृति नहीं दी। इसी दौरान वन विभाग ने खेल का सामान बनाने वाली एक कंपनी को भूमि का वही टुकड़ा पेड़ काटने और खेल का सामान बनाने के लिए अर्थात व्यावसायिक रूप में प्रयोग करने के लिए दे दिया। उस कंपनी ने जब पेड़ काटने आरम्भ किये तो गाँव वालो की इसकी जानकारी मिली और उसमें सरकार के विरुद्ध रोप पैदा हुआ तथा उन्होंने पेड़ों की कटाई का सामूहिक रूप से विरोध किया। विरोध यह तरीका अपनाया गया की गाँव का प्रत्येक निवासी, स्त्री या पुरुष पेड़ से चिपक जाएँ और इसे कटाने न दें। शीघ्र ही विरोध सारे राज्य के पहाड़ी इलाकों में फैल गया और इसका प्रभाव दूसरे राज्यों पर भी पड़ा। इस आंदोलन का नाम चिपको आंदोलन पड़ा। समय के साथ आंदोलन ने कई और मुद्दों को भी साथ ले लिया। क्षेत्र के परिस्थितिकी की और आर्थिक मुद्दे भी इससे जुड़े। इस आंदोलन के अंतर्गत ग्रामीण जनता ने कई मांगें रखी जो निम्नलिखित हैं -

  1. स्थानीय लोगों का यहाँ के प्राकृतिक संसाधनों जैसे की जंगल, भूमि, खनिज पदार्थो पर अधिक अधिकार है और इन पर उनका नियंत्रण होना चाहिए।
  2. पेड़ों की कटाई का ठेका बहरी लोगों को नहीं दिया जाना चाहिए, केवल स्थानीय लोगों को ही इस ठेके को प्राप्त करने का अधिकार होना चाहिए।
  3. यह भी मांग रखी गई की ग्रामीण जीवन के विकास और आर्थिक समृद्धि के लिए गाँवों में लघु उघोगो को बढ़ावा दिया जाए और इसके लिए ग्रामीण लोगों को रियायती दरों पर सामग्री तथा औंजार दिए जाएँ।
  4. पहाड़ी क्षेत्रों की सुंदरता पेड़ों से ही है और पेड़ों की कटाई इस सुंदरता को हानि पहुंचाती है तथा पर्यावरण के संतुलन को नष्ट करती है। इसलिए इस परिस्थिति के संतुलन को हानि पहुँचाए बिना ही विकास गतिविधियाँ को संचालित किया जाए।
  5. इस आंदोलन में भूमिहीन वन कर्मचारियों के कम वेतन तथा उनकी कमजोर आर्थिक स्थिति का मुद्दा भी जोड़ लिया गया और वह माँग की गई की वन कर्मचारियों तथा मजदूरों के न्यूनतम वेतन की वैधानिक व्यवस्था की जाए।
  6. आंदोलन में भागीदारी करने वाली महिलाएँ पुरुषों की शराब पिने की आदत से भी परेशान थीं और चिपको आंदोलन में उनकी अधिक भागीदारी थी। अतः शराब बंदी का मुद्दा भी इसके अंतर्गत उठाया गया और क्षेत्र में शराबबंदी की माँग की गई।
  • प्रभाव - चिपको आंदोलन 1973 में दो गांवों से आरम्भ होकर सारे राज्य में विशेषकर पहाड़ी क्षेत्रों में फैल गया और इसमें पेड़ों की कटाई पर रोक लगाए जाने के साथ और भी कई सामाजिक मुद्दे शामिल हो गए। अंततः इसमें लोगों को सफलता मिली - 
  1. सरकार ने अगले 15 वर्षों के लिए पहाड़ी क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी।
  2. इस आंदोलन ने पहाड़ी क्षेत्र के लोगों, विशेषकर महिलाओं में अपने अधिकारों के प्रति चेतना जागृत की।
  3. चिपको आंदोलन ने देश के अन्य राज्यों में भी जन आंदोलन के आरम्भ करने में भूमिका निभाई क्योंकि अन्य क्षेत्रों को सहसूस हुआ की वे किसी राजनितिक दल का सहारा लिए बिना, अपने स्वयं के प्रयासों से अपनी कठिनाइयों की अभिव्यवक्ति कर सकते है और सामूहिक प्रयास से उनका समाधान करवा सकते हैं।
  4. इस क्षेत्र में शराब बंदी के बारे में भी जन चेतना उतपन्न हुई।
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जन आंदोलनों की प्रकृति
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 7: जन आंदोलनों का उदय - प्रश्नावली [पृष्ठ १४६]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Political Science [Hindi] Class 12
पाठ 7 जन आंदोलनों का उदय
प्रश्नावली | Q 3. | पृष्ठ १४६

संबंधित प्रश्‍न

चिपको आंदोलन के बारे में निम्नलिखित कथन गलत या सही का चिन्ह लगाए।

यह पेड़ों की कटाई को रोकने के लिए चला एक पर्यावरण आंदोलन था।


चिपको आंदोलन के बारे में निम्नलिखित कथन गलत या सही का चिन्ह लगाए।

इस आंदोलन ने परिस्थितिकी और आर्थिक शोषण के मामले उठए।


चिपको आंदोलन के बारे में निम्नलिखित कथन गलत या सही का चिन्ह लगाए।

यह महिलाओं द्वारा शुरू किया गया शराब - विरोधी आंदोलन था।


चिपको आंदोलन के बारे में निम्नलिखित कथन गलत या सही का चिन्ह लगाए।

इस आंदोलन की माँग थी की स्थानीय निवासियों का अपने प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण होना चाहिए।


नीचे लिखे कथन गलत हैं। इनकी पहचान करें और ज़रूरी सुधार के साथ उन्हें बुरुस्त करके दोबारा लिखें:

सामाजिक आंदोलन भारत के लोकतंत्र को हानि पहुँचा रहे हैं।


नीचे लिखे कथन गलत हैं। इनकी पहचान करें और ज़रूरी सुधार के साथ उन्हें बुरुस्त करके दोबारा लिखें:

सामाजिक आंदोलनों की मुख्य ताकत विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच व्याप्त उनका जनधार है।


नीचे लिखे कथन गलत हैं। इनकी पहचान करें और ज़रूरी सुधार के साथ उन्हें बुरुस्त करके दोबारा लिखें:

भारत के राजनीतिक दलों ने कई मुद्दों को नहीं उठाया। इसी कारण सामाजिक आंदोलनों का उदय हुआ।


आंध्रा प्रदेश में चले शराब - विरोधी आंदोलन ने देश का ध्यान कुछ गंभीर मुद्दों की तरह खिंचा। ये मुद्दे क्या थे?


निम्नलिखित अवतरण को पढ़ें और इसके आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दें:

लगभग सभी नए सामाजिक आंदोलन नयी समस्याओं जैसे - पर्यावरण का विनाश, महिलाओं की बदहाली, आदिवासी संस्कृतिक का नाश और मानवाधिकारों का उल्लंघन के समाधान को रेखांकित करते हुए उभरे। इनमें से कोई भी अपनेआप में समाजव्यवस्था के मूलगामी बदलाव के सवाल से नहीं जुड़ा था। इस अर्थ में ये आंदोलन अतीत की क्रांतिकारी है सामाजिक आंदोलनों का एक बड़ा दायरा ऐसी चीजों की चपेट में है की वह एक ठोस तथा एकजुट जन आंदोलन का रूप नहीं ले पाता और न ही वंचितों और गरीबों के लिए प्रासंगिक हो पाता है। ये आंदोलन बिखरे - बिखरे हैं, प्रतिक्रिया के तत्वों से भरे हैं, अनियत है और बुनियादी सामाजिक बदलाव के लिए इनके पास कोई फ्रेमवर्क नहीं है। 'इस' या 'उस' के विरोध (पशिचमी - विरोधी, पूंजीवादी विरोध, 'विकास - विरोधी, आदि) में चलने के कारण इनमे कोई संगति आती हो अथवा दबे - कुचले लोगों और हाशिए के समुदायों के लिए ये प्रासंगिक हो पाते हों - ऐसी बात नहीं।

- रजनी कोठरी

  1. नए सामाजिक आंदोलन और क्रांतिकरी विचारधाराओं में क्या अंतर है?
  2. लेखक के अनुसार सामाजिक आंदोलन की सीमाएँ क्या - क्या हैं?
  3. यदि सामाजिक आंदोलन विशिष्ट मुद्दों को उठाते हैं तो आप उन्हें 'बिखरा' हुआ कहेंगे या मानेगे की वे अपने मुद्दे पर कही ज़्यादा केंद्रित हैं। अपने उत्तर की पुष्टि में तर्क दीजिए।

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