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प्रश्न
‘वैज्ञानिकता की दौड़ में बिखरते हुए मानवीय रिश्ते’ विषय पर अपने विचार व्यक्त कीजिए।
उत्तर
वर्तमान वैज्ञानिक युग में चाहे कोई भी क्षेत्र हो वैज्ञानिक अविष्कारों एवं खोजो से बनाई गई वस्तुओं का प्रचलन दिनों-दिन बढ़ता ही जा रहा है। चाहे रेल हो या हवाई जहाज़, चलचित्र हो या चिकित्सा उपकरण या फिर कंप्यूटर या स्मार्टफोन हमारे जीवन की दिनचर्या में इनका समावेशन प्रत्येक जगह पाया जाता है। इस समय इक्कीसवीं शताब्दी का प्रथमार्थ चल रहा है। दुनिया में बहुत सारे परिवर्तन हो रहे हैं। परिवर्तन प्रकृति का शाश्वत नियम है। प्रगति की दौड़ में पीछे रह जाने का भय सब में समाया हुआ है। अधिक-से-अधिक वैज्ञानिक सुविधाएँ जुटाने के लिए मनुष्य दिन-रात काम कर रहा है। बच्चे घर में सोते रहते हैं, पिता काम पर चला जाता है, और जब वह घर लौटता है, तब उसे अपने बच्चे सोए हुए मिलते हैं। माता-पिता का जो प्यार बच्चों को मिलना चाहिए, वह नहीं मिलता। वैज्ञानिक प्रगति द्वारा मानवीय मूल्यों का ह्रास हो रहा है, जैसे की धार्मिक आस्था में कमी, व्यक्ति के संयम में कमी, मानवीय भावनाओं में कमी, इसका स्पष्ट परिणाम यह हो रहा है कि वैज्ञानिकता (आधुनिकता) की दौड़ में मानवीय रिश्ते बिखरते जा रहे हैं।
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