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विज्ञान की प्रकृति से संबंधित कुछ अत्यंत पारंगत प्रकथन आज तक के महानतम वैज्ञानिकों में से एक अल्बर्ट आइंस्टाइन द्वारा प्रदान किए गए हैं। आपके विचार से आइंस्टाइन को उस समय क्या तात्पर्य था, - Physics (भौतिक विज्ञान)

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प्रश्न

विज्ञान की प्रकृति से संबंधित कुछ अत्यंत पारंगत प्रकथन आज तक के महानतम वैज्ञानिकों में से एक अल्बर्ट आइंस्टाइन द्वारा प्रदान किए गए हैं। आपके विचार से आइंस्टाइन  को उस समय क्या तात्पर्य था, जब उन्होंने कहा था-“संसार के बारे में सबसे अधिक अबोधगम्य विषय यह है कि यह बोधगम्य है?”

थोडक्यात उत्तर

उत्तर

हमारे चारों ओर, उपस्थित ब्रम्हांड अत्यंत जटिल है तथा इसमें होने वाली परिघटनाएँ भी अत्यंत  जटिल हैं, परंतु विज्ञान के अनेक नियम ऐसे हैं जो इन सभी परिघटनाओं की व्याख्या करने में पूर्णतः समर्थ हैं। अतः जब कोई घटना हम पहली बार देखते या सुनते हैं, वह अबोधगम्य होती है, परंतु जब हम उस घटना से संबंधित सिद्धांत, नियम, तथ्य आदि का गहन विश्लेषण करते हैं तो वह घटना हमारे लिए बोधगम्य हो जाती है।

अत: भौतिक जगत से सम्बद्ध प्रत्येक तथ्य की सुस्पष्ट व्याख्या विज्ञान विषय में उपलब्ध है। जब हमारी जिज्ञासु प्रवृत्ति किसी तथ्य से संबंध वैज्ञानिक दृष्टिकोण जानना चाहती है तो हम उसे जान लेते हैं जिससे जटिल से जटिल परिघटना भी हमारे लिए आश्चर्य का कारण नहीं बनती; अतः आइंस्टाइन का यह कथन तर्कसंगत है।

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भौतिकी, प्रौद्योगिकी तथा समाज
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 1: भौतिक जगत - अभ्यास [पृष्ठ १४]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Physics [Hindi] Class 11
पाठ 1 भौतिक जगत
अभ्यास | Q 1.1 | पृष्ठ १४

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