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प्रश्न
विशेषण-विशेष्य-मेलनं कुरुत।
विशेष्यम् | विशेषणम् |
सहचरः | पोषितौ |
विलापः | अश्रुतपूर्वा |
कुशलवौ | करुणः |
वाणी | निश्चेष्टः |
उत्तर
विशेष्यम् | विशेषणम् |
सहचरः | निश्चेष्टः |
विलापः | करुणः |
कुशलवौ | पोषितौ |
वाणी | अश्रुतपूर्वा |
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सन्धिविग्रहं कुरुत।
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जलधरः
सन्धिविग्रहं कुरुत।
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समानार्थकशब्दं लिखत।
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समानार्थकशब्दं लिखत।
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योग्यरूपं योजयत।
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योग्यरूपं योजयत।
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चतुर्थं पदं लिखत।
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यः गणपतिस्तोत्रं जपेत् सः षडभिः मासैः फलं लभेत।
तालिकां पूरयत।
एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | विभक्तिः |
______ | ______ | जगन्ति | प्रथमा |
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______ | ______ | उषस्सु | सप्तमी |
योग्यं रूपं लिखत।
वर्षाकाले ______ (वियत्) तडित् प्रकाशते।
सर्वनामतालिकां पूरयत।
एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | विभक्तिः |
तव, ते | ______ | ______ | षष्ठी |
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______ | ______ | भवतः | द्वितीया |
रूपाणि परिचिनुत।
अ. क्र. | धातुः | गणः/पदं | कालः | पुरषः | वचनम् | |
१ | प्राप्स्यामि | ______ | ______ | ______ | ______ | ______ |
२ | अहरत् | ______ | ______ | ______ | ______ | ______ |
३ | पूज्यते | ______ | ______ | ______ | ______ | ______ |
४ | चोरयतु | ______ | ______ | ______ | ______ | ______ |
सन्धिकोषः।
नासाग्रमालोकयेद् = ______ + आलोकयेत्।
सन्धिकोषः।
किञ्चिदपि = ______ + अपि।
सन्धिकोषः।
अधुनापि = ______ + अपि।
सन्धिकोषः।
परोपकारार्थमिदम् = ______ + इदम्।
सन्धिकोषः।
______ = विपरीताः + चेत्।
सन्धिकोषः।
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सन्धिकोषः।
ततस्तेन = ______ + तेन।
सन्धिकोषः।
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'इदम्' सर्वनाम पुंलिङ्गम्।
एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | विभक्तिः |
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अनेन /एनेन | ______ | ______ | तृतीया |
अस्मै | ______ | ______ | चतुर्थी |
अस्मात् | ______ | ______ | पञ्चमी |
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भवत् आदरार्थकं सर्वनाम।
भवत् - स्त्रीलिङ्गम् (भवती)
एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | विभक्तिः |
भवती | ______ | ______ | प्रथमा |
भवतीम् | ______ | ______ | द्वितीया |
भवत्या | ______ | ______ | तृतीया |
भवत्यै | ______ | ______ | चतुर्थी |
भवत्याः | ______ | ______ | पञ्चमी |
भवत्याः | ______ | ______ | षष्ठी |
भवत्याम् | ______ | ______ | सप्तमी |
हे भवति | ______ | ______ | सम्बोधनम् |
अव्ययस्य विशिष्टं अव्ययरूपस्य आवश्यकता भवति। अधोक्तम् अस्ति।
अभितः = ______