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विविधीकरण के स्रोत के रूप में पशुपालन, मत्स्यपालन और बागवानी के महत्त्व पर टिप्पणी करें। - Economics (अर्थशास्त्र)

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प्रश्न

विविधीकरण के स्रोत के रूप में पशुपालन, मत्स्यपालन और बागवानी के महत्त्व पर टिप्पणी करें।

थोडक्यात उत्तर

उत्तर

  • पशुपालन का महत्त्वः भारत में कृषक समुदाय प्रायः मिश्रित कृषि पशुधन व्यवस्था का अनुसरण करता है। इसमें गाय-भैंस और मुर्गी-बत्तख बहुतायत में पाई जाने वाली प्रजातियाँ हैं।
  1. मवेशियों के पालन से परिवार की आय में अधिक स्थिरता आती है। साथ ही खाद्य सुरक्षा, परिवहन, ईंधन, पोषण आदि की व्यवस्था भी परिवार की अन्य खाद्य उत्पादक (कृषक) गतिविधियों में अवरोध के बिना ही प्राप्त हो जाती है।
  2. आज पशुपालन क्षेत्रक देश के 7 करोड़ छोटे एवं सीमांत किसानों और भूमिहीन श्रमिकों को आजीविका कमाने के वैकल्पिक साधन सुलभ करा रहे हैं।
  3. महिलाओं की भी एक बड़ी संख्या इस क्षेत्र से रोज़गार पाती हैं।
  • मत्स्य पालन का महत्त्वः आजकल देश के समस्त मत्स्य उत्पादन का 49% अंर्तवर्ती देशों और 51% महासागरीय क्षेत्रों से प्राप्त हो रहा है।
  1. यह मत्स्य उत्पादन सकल घरेलू उत्पाद का 1.4% है।
  2. सागरीय उत्पादकों में प्रमुख राज्य केरल, गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु हैं।।
  3. यद्यपि महिलाएँ मछलियाँ पकड़ने के काम में नहीं लगी हैं पर 60% निर्यात और 40% आंतरिक मत्स्य व्यापार को संचालन इन्हीं के हाथों में है।
  • उद्यान विज्ञान ( बागवानी) का महत्त्वः 1991-2003 के बीच अवधि को ‘स्र्वाणमि क्रांति कहा जाता है।
  1. भारत आम, केला, नारियल, काजू जैसे फलों और अनेक मसालों के उत्पादन में आज विश्व का अग्रणी देश माना जाता है।
  2. फल-सब्जियों के उत्पादन में भारत का विश्व में दूसरा स्थान है।
  3. बागवानी में लगे बहुत से कृषकों की दशा में बहुत सुधार हुआ है। पुष्पारोपण, पौधशाला की देखभाल, संकर बीजों का उत्पादन, ऊतक-संवर्धन, फल-फूलों का संवर्धन और खाद्य प्रसंस्करण ग्रामीण महिलाओं के लिए अब अधिक आय वाले रोज़गार बन गए हैं।
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उत्पादक गतिविधियों का विविधीकरण
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 6: ग्रामीण विकास - अभ्यास [पृष्ठ ११८]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Economics [English] Class 12
पाठ 6 ग्रामीण विकास
अभ्यास | Q 13. | पृष्ठ ११८
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