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प्रश्न
युग्मकों के बनने के लिए किस प्रकार का कोशिका विभाजन होता है? इस विभाजन का महत्व बताएं।
उत्तर
युग्मकों के बनने के लिए मीयोसिस (Meiosis) प्रकार का कोशिका विभाजन होता है।
मीयोसिस कोशिका विभाजन न केवल युग्मकों के निर्माण में मदद करता है, बल्कि यह आनुवांशिक विविधता और गुणसूत्रों की स्थिर संख्या सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही विभाजन जीवन की विविधता और अनुकूलनशीलता का मूल आधार है।
अर्धसूत्रीविभाजन का महत्व:
- गुणसूत्रों की संख्या का आधा होना: मीयोसिस में कोशिका विभाजन के दौरान एक द्विगुणित कोशिका (diploid cell) से चार नई हाप्लॉइड (haploid) कोशिकाएँ बनती हैं, जिनमें गुणसूत्रों की संख्या मूल कोशिका की तुलना में आधी होती है। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि निषेचन के बाद जीन की सही संख्या (द्विगुणित संख्या) बनी रहती है।
- आनुवांशिक विविधता: मीयोसिस में गुणसूत्रों का पुनर्संयोजन (crossing over) होता है, जिससे आनुवंशिक सामग्री का आदान-प्रदान होता है। इस प्रक्रिया के कारण उत्पन्न नई कोशिकाएँ आनुवंशिक रूप से भिन्न होती हैं। यही विविधता प्रजातियों के विकास और अनुकूलन में मदद करती है।
- प्रजनन में भूमिका: मीयोसिस युग्मकों (स्पर्म और एग) के उत्पादन के लिए आवश्यक है। प्रजनन के दौरान, युग्मकों का मिलन होता है और नया जीव उत्पन्न होता है, जिसमें माता-पिता दोनों के गुणसूत्र सम्मिलित होते हैं।
- संतुलित गुणसूत्र संख्या: मीयोसिस सुनिश्चित करता है कि अगली पीढ़ी में गुणसूत्रों की संख्या स्थिर बनी रहे। यदि मीयोसिस न हो, तो प्रत्येक पीढ़ी में गुणसूत्रों की संख्या दुगुनी हो जाती, जिससे जीव का सामान्य विकास संभव नहीं होता।
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