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Maharashtra State BoardSSC (English Medium) 7th Standard

३०° अक्षांश के निकट, अधिक वायुदाब पेटी का निर्माण कैसे होता है? वह क्षेत्र मरुभूमीय क्यों होता है? - Marathi (Second Language) [मराठी (द्वितीय भाषा)]

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Question

३०° अक्षांश के निकट, अधिक वायुदाब पेटी का निर्माण कैसे होता है? वह क्षेत्र मरुभूमीय क्यों होता है?

Short Answer

Solution

  1. 30° अक्षांश के निकट उच्च वायुदाब पेटी का निर्माण:
    1. विषुवतीय क्षेत्र की गर्म हवा हल्की हो जाती है, ऊपर उठने लगती है और ऊँचाई पर पहुँचने के बाद उत्तर एवं दक्षिण ध्रुवों की ओर प्रवाहित होती है।
    2. ऊँचाई पर तापमान कम होने के कारण यह हवा ठंडी होकर भारी हो जाती है।
    3. इस प्रकार भारी हुई हवा दोनों गोलार्धों में 25° से 35° अक्षांशों के बीच नीचे उतरती है।
    4. इसके परिणामस्वरूप, दोनों गोलार्धों में उच्च वायुदाब पेटियाँ बनती हैं।
      इसी तरह, 30° अक्षांश के निकट एक उच्च वायुदाब पेटी का निर्माण होता है।
  2. 30° अक्षांश के निकट गर्म रेगिस्तानों के बनने के कारण:
    1. मध्यम अक्षांशीय उच्च वायुदाब पेटियों (25° से 35° अक्षांशों के बीच) की हवा शुष्क होती है।
    2. शुष्क हवा में जलवाष्प की मात्रा बहुत कम होती है, जिससे इस क्षेत्र में वर्षा अत्यंत कम या नहीं के बराबर होती है। इसी कारण, इस क्षेत्र में गर्म रेगिस्तान पाए जाते हैं।
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Chapter 7.1: वायुदाब - स्वाध्याय [Page 153]

APPEARS IN

Balbharati Integrated 7 Standard Part 2 [Hindi Medium] Maharashtra State Board
Chapter 7.1 वायुदाब
स्वाध्याय | Q ५ | Page 153
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