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Question
आज की चीनी अर्थव्यवस्था नियंत्रित अर्थव्यवस्था से किस तरह अलग है?
Long Answer
Solution
- आज की चीनी अर्थव्यवस्था नियंत्रित अर्थव्यवस्था से निम्न प्रकार से अलग हैं -
- 1949 में माओ के नेतृत्व में हुई साम्यवादी क्रांति के बाद चीनी जनवादी गणराज्य शासन व्यवस्था की स्थापना के समय यहाँ की अर्थव्यवस्था सोवियत मॉडल पर आधारित थीं। आर्थिक रूप से पिछड़े साम्यवादी चीन ने पूँजीवादी दुनिया से अपने रिश्ते तोड़ लिए। ऐसे में इसके पास अपने ही संशाधनों से गुजारा करने के अलावा कोई चारा नहीं था। कई समय तक इसे सोवियत मदद और सलाह भी मिली थी। इसने विकास का जो मॉडल अपनाया उसमे खेती से पूँजी लेकर सरकारी बड़े उद्योग खड़े करने पर जोर था। चूकि इसके पास विदेशी बाजारों से तकनीक और सामनों को खरीदने के लिए विदेशी मुद्रा की कमी थी इसीलिए चीन ने आयात किए जाने वाले सामानों को धीरे - धीरे घरेलू स्तर पर ही तैयार करवाना शुरू किया।
- इस मॉडल ने चीन को अभूतपूर्ण स्तर पर औद्योगिक अर्थव्यवस्था खड़ी करने का आधार बनाने के लिए सारे संसाधनों का इस्तमाल करने दिया। सभी नागरिकों को रोजगार और सामाजिक कल्याण योजनाओ का लाभ देने के दायरे में लाया गया और चीन अपने नागरिको को शिक्षित करने और उन्हें स्वस्थय सुविधाए उपलब्ध कराने के मामलो में सबसे विकसित देशों से भी आगे निकल गया।
- चीन की अर्थव्यवस्था का विकास भी ५ से ६ फीसदी की दर से हुआ। परन्तु जनसंख्या में २ - ३ प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि इस विकास दर पर पानी फेर रहे थी और बढ़ती हुई आबादी विकास के लाभ से वंचित रह जा रही थीं। खेती की पैदावार उद्योगों की पूरी जरूरत लायक अधिक्षेप नहीं दे पति थी राज्य नियंत्रण आर्थिक के संकट का सामना चीन को भी करना पड रहा था। इसका औधोगिक उत्पादन पर्याप्त तेजी से नहीं बढ़ रहा था। विदेशी व्यापार न के बराबर था और प्रति व्यक्ति आय भी बहुत कम थी।
- 1970 के बाद से जारी चीन की आर्थिक सफलता को एक महाशक्ति के रूप में इसके उभरने के साथ जोड़कर देखा जाता है और आर्थिक एकांतवास को समाप्त किया। 1973 में प्रधानमंत्री चाऊ एन - लाई ने कृषि, उद्योग, सेना और विज्ञान - प्रोधोगिक के क्षेत्र में अधीनीकरण के चार प्रस्ताव रखे। 1978 में तत्कालीन नेता देंग श्याओ पेंग ने चीन में आर्थिक सुधारों द्वारा की निति की घोषणा की। अब निति यह बनाई गई की विदेशी पूँजी और प्रोधोगिक के निवेश से उच्चतर उत्पादकता को प्राप्त किया जाए। बजारमूलक अर्थव्यवस्था को अपनाने के लिए चीन ने अपना तरीका आजमाया।
- 1978 के बाद से जारी चीन की आर्थिक साफलता को एक महाशक्ति के रूप में इसके उभरने के साथ जोड़कर देखा जाता है। आर्थिक सुधारों की शुरुआत करने के बाद चीन सबसे ज्यादा तेजी से आर्थिक वृद्धि कर रहा है और मना जाता है की इस रफ़्तार से चलते हुए 2040 तक वह दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति, अमरीका से भी आगे निकल जाएग। आर्थिक स्तर पर अपने पडोसी मुल्कों से जुड़ाव के चलते चीन पूर्व एशिया के विकास का इंजन - जैसा बना हुआ है और इस कारण क्षेत्रीय मानलों में उसका प्रभाव बहुत बढ़ गया है। इसकी विशाल आबादी, बड़ा भू - भाग, संसाधन, क्षेत्रीय अवस्थिति और राजनैतिक प्रभाव इस तेज आर्थिक वृद्धि के साथ मिलकर चीन के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देते हैं। चीन ने 'शॉन थेरेपी' पर अम्ल करने के बजाए अपनी अर्थव्यवस्था को चरणबद्ध ढंग से खोला।
- 1982 में खेती का निजीकरण किया गया और उसके बाद 1998 में उद्योगों का। व्यापार संबंधी अवरोधों को सिर्फ विशेष आर्थिक क्षेत्रों के लिए ही हटाया गया है जहा विदेशी निवेशक अपने उद्यम लगा सकते हैं।
- नयी आर्थिक नीतियों के कारण चीन को अर्थव्यवस्था को अपनी जड़ता से उबरने में मदद मिली। कृषि के निजीकारण के कारण कृषि - उत्पादो तथा ग्रामीण आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में निजी बचत का परिणाम बढ़ा और इससे ग्रामीण उद्योगों की संख्या बड़ी तेजी से बढ़ी। व्यापार के नए कानून तथा विशेष आर्थिक क्षेत्रों के निर्माण से विदेशी व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
- राज्य द्वारा नियंत्रित अर्थव्यवस्था के अंतर्गत विदेशी पूंजी के निवेश के लिए कोई स्थान नहीं होता। परन्तु चीन की अर्थव्यवस्था विदेशी पूँजी के निवेश को आकर्षित करती है और यह संसार में सबसे अधिक आकर्षक मानी जाती है।
- राज्य द्वारा नियंत्रित अर्थव्यवस्था में निजी संपत्ति के लिए कोई स्थान नहीं होता, परन्तु चीन में अब निजी संपत्ति की धरणा को स्वीकार किया गया है। सन 2004 में निजी संपत्ति, जो की वैध तरीकों से अर्जित की गई हो, रखे जाने का अधिकार दिया गया। मार्च 2007 में चीन की राष्टीय जन कांग्रेस ने यह प्रस्ताव पास कर दिया है की निजी संपत्ति भी उसी प्रकार से सरकार द्वारा सुरक्षित की जाएगी जैसे की सरकारी संपत्ति।
- राज्य द्वारा नियंत्रित अर्थव्यवस्था में उद्योगें संबंधी कड़े कानून लागु किये जाते है और श्रमिकों के हितों की ओर ही ध्यान दिया जाता है। उत्पादन की मात्रा तथा वस्तुओं की कीमते सरकारी निश्चित करती है। परन्तु चीन में इन कानूनों में ढील दे दी गई हैं।
- चीनी अर्थव्यवस्था की एक नई विशेषता यह है की सरकार ने विशेष आर्थिक क्षेत्र स्थापित किये हैं। इस विशेष आर्थिक में लगाए जाने वाले उद्योगों पर उद्योग तथा श्रम संबंधी कानून को काफी ढील दी गई है और वह विदेशी निवेशकों को अपने निजी उद्योग लगाने के लिए आकर्षित करने हेतु यह कदम उठाया है। इन विशेष आर्थिक क्षेत्रो से बाहर लगे उद्योग पर कड़े कानून लागू होते हैं।
- राज्य द्वारा नियंत्रित अर्थव्यवस्था विश्व मार्किट के साथ स्पर्धा नहीं करती परन्तु चीन ने अपनी अर्थव्यवस्था को विश्व बजार से स्पर्धा करने योग्य बनाया है और वह विश्व व्यापार संगठन का सदस्य बना है।
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चीनी अर्थव्यवस्था का उत्थान
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इसमें से किसने 'खुले द्वार' की निति अपनाई?
खाली स्थान भरें -
चीन ने 1972 में ______ के साथ दोतरफा संबंध शुरू करके अपना एकांतवास समाप्त किया।
चीन और भारत की उभरती अर्थव्यवस्थाओं में मौजूद एकध्रुवीय विश्व व्यवस्था को चुनौती दे सकने की क्षमता है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? अपने तर्कों से अपने विचारों को पुष्ट करें।