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आप यह कैसे जानेंगे कि कोई मृदा उर्वर है या नहीं? प्राकृतिक रूप से निर्धारित उर्वरता और मानवकृत उर्वरता में अंतर स्पष्ट कीजिए। - Geography (भूगोल)

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Question

आप यह कैसे जानेंगे कि कोई मृदा उर्वर है या नहीं? प्राकृतिक रूप से निर्धारित उर्वरता और मानवकृत उर्वरता में अंतर स्पष्ट कीजिए।

Answer in Brief

Solution

महीन कणों वाली लाल और पीली मृदाएँ सामान्यतः उर्वर होती हैं। इसके विपरीत मोटे कणों वाली उच्च भूमियों की मृदाएँ अनुर्वर होती हैं। इनमें सामान्यतः नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और ह्यूमस की कमी होती है। जलोढ़क मृदाओं में महीन गाद होता है। इस प्रकार की मृदा में कैल्सियमी संग्रंथन अर्थात् कंकड़ पाए जाते हैं। काली मृदाओं में नमी के धीमे अवशोषण ओर क्षय की विशेषता के कारण लंबी अवधि तक नमी बनी रहती है। इस कारण शुष्क ऋतु में भी फसलें फलती-फूलती रहती हैं। लैटेराइट मृदा में लोहे के ऑक्साइड और एल्यूमीनियम के यौगिक तथा पोटाश अधिक मात्रा में होते हैं। ह्युमस की मात्रा कम होती है। इस मृदा में जैव पदार्थ, नाइट्रोजन, फॉस्फेट और कैल्सियम की कमी होती है। शुष्क मृदा में ह्यूमस और जैव पदार्थ कम मात्रा में पाए जाते हैं। इसलिए यह मृदा अनुर्वर होती है। लवण मृदा में सोडियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम का अनुपात अधिक होता है।

अतः यह अनुर्वर होती है। पीटमय मृदा उर्वर होती है। प्राकृतिक रूप से मृदा की उर्वरता पोषक तत्वों की विद्यमानता पर निर्भर करती है। मृदा की उत्पादकता कई भौतिक गुणों पर निर्भर करती है। जबकि मानवकृत उर्वरता में जब मृदा में विभिन्न तत्त्वों की कमी हो जाती है तो मानव निर्मित रसायन जैसे पोटाश, फॉस्फोरस, नाइट्रोजन, गंधक, मैग्नीशियम आदि उचित मात्रा में मिलाकर मृदा की उर्वरता को बढ़ाया जाता है।

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मृदा का वर्गीकरण
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Chapter 6: मृदा - अभ्यास [Page 79]

APPEARS IN

NCERT Geography - India: Physical Environment [Hindi] Class 11
Chapter 6 मृदा
अभ्यास | Q 3. (iii) | Page 79
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