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Question
अगर सम्राट त्राजान भारत पर विजय प्राप्त करने में वास्तव में सफल होते और रोमवासियों का इस वेश पर अनेक सदियों तक कब्ज़ा रहा होता तो क्या आप सोचते हैं कि भारत वर्तमान समय के देश से किस प्रकार भिन्न होता?
Solution
यदि सम्राट त्राजान भारत पर विजय प्राप्त करने में वास्तव में सफल रहा होता और रोमवासियों को इस देश पर अनेक सदियों तक कब्ज़ा रहा होता तो भारतीय संस्कृति, शिक्षा, धर्म, भाषा, कला, साहित्य, संगीत, वास्तुकला, वेशभूषा व स्थापत्यकला आदि पर भी व्यापक प्रभाव पड़ता। जब भी दो भिन्न-भिन्न संस्कृतियाँ आपस में एक-दूसरे से परस्पर मिलती हैं तो उन दोनों संस्कृतियों के मध्य कुछ सांस्कृतिक तत्त्व आत्मसात कर लिए जाते हैं और कुछ को त्याग दिया जाता है। इस प्रकार एक नए सामाजिक व सांस्कृतिक परिवेश का जन्म होता जिसमें दोनों संस्कृतियों के तत्त्व एक-दूसरे के पूरक के रूप में दिखाई देते हैं।
इसके अतिरिक्त कोई भी बाह्य शासक यदि किसी देश पर आक्रमण करता है तो उसका उद्देश्य उस विजित देश का सामाजिक, सांस्कृतिक व आर्थिक रूप से शोषण करना ही होता है। उसका मूल उद्देश्य उस देश की सभ्यता को नष्ट कर अपनी सभ्यता व अपने धर्म का विस्तार व प्रचार-प्रसार करना होता है। जैसा कि बाबर भारतीय संस्कृति को तहस-नहस व लूटपाट के ही उद्देश्य से भारत आया था किन्तु इसकी सांस्कृतिक विविधता के आगे उसका सारा अहं चकनाचूर हो गया। भारतीय संस्कृति की यही विशेषता रही है कि उसने सदैव दूसरी संस्कृतियों की अच्छाइयों को आत्मसात किया है। उदाहरण के लिए मुगलों के पश्चात् अंग्रेज लोग भारत आए। वे भी एक प्रकार से आक्रमणकारी ही थे। उन्होंने भारतीय संस्कृति को पूर्णरूप से प्रभावित किया लेकिन भारतीय संस्कृति ने अपने स्वाभाविक रूप को पूर्णरूपेण नहीं बदला बल्कि अंग्रेजी संस्कृति को भी अपने भीतर समाहित कर लिया।
इसी प्रकार यदि सम्राट त्राजान भारत विजय में सफल रहा होता तो आज का भारत अवश्य ही कुछ निम्न अर्थों में भिन्न होता
- सांस्कृतिक क्षेत्र में कला, भवन निर्माण कला, मूर्तिकला व स्थापत्यकला का नमूना रोमन कला के आधार पर होता।
- अनेक रोमन प्रांतों की भाँति यहाँ भी छोटे-छोटे राज्य स्थापित होते।
- ईसाई धर्म राजधर्म के रूप में घोषित हो जाता।
- दास प्रथा को बढ़ावा मिला होता।।
- भारत का शोषण आर्थिक आधार पर होता जैसा कि अंग्रेजों ने लगभग 200 वर्षों तक किया था।
इस प्रकार कहा जा सकता है कि आज का भारत त्राजान के आक्रमण से नि:संन्देह भिन्न होता।