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Question
अल्पसंख्यक वर्गों को राज्य से संरक्षण की क्यों ज़रूरत होती है?
Long Answer
Solution
- जो समूह सांख्यिकीय दृष्टि से अल्पसंख्यक होते हैं, जैसे बाएँ हाथ से काम करने वाले अथवा 29 फरवरी को पैदा होने वाले, समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से अल्पसंख्यक नहीं होते, क्योंकि वे किसी सामूहिकता का निर्माण नहीं करते। धार्मिक तथा सांस्कृतिक रूप से अल्पसंख्यकों को बहुसंख्यकों के प्रभुत्व के कारण संरक्षण की आवश्यकता होती है।
- इस तरह के समूह राजनीतिक रूप से भी असुरक्षित होते हैं। उन्हें इस बात का हमेशा डर बना रहता है कि बहुसंख्यक समुदाय सत्ता पर कब्ज़ा करके उनकी सांस्कृतिक तथा धार्मिक संस्थाओं पर दमन करना प्रारंभ कर देगा तथा अंततोगत्वा उन्हें अपनी पहचान से हाथ धोना पड़ेगा।
अपवाद - धार्मिक अल्पसंख्यक जैसे पारसी अथवा सिख यद्यपि आर्थिक रूप से संपन्न समुदाय हैं, किंतु सांस्कृतिक दृष्टि से वे अब भी वंचित समुदाय हैं, क्योंकि हिंदू समुदाय की तुलना में उनकी संख्या बहुत ही कम है।
- दूसरी बड़ी समस्या राज्य की उस प्रतिबद्धता को लेकर है, जिसमें कि वह एक तरफ तो धर्मनिरपेक्षता की बात कहता है और दूसरी तरफ अल्पसंख्यकों के संरक्षण की भी बात करता है।
- अल्पसंख्यकों को सरकार के द्वारा संरक्षण प्रदान किया जाना, इसलिए भी आवश्यक है ताकि वे राजनीति की मुख्यधारा में बहुसंख्यकों की तरह ही शामिल हो सकें।
- किंतु इसे कुछ लोग पक्षपातपूर्ण नीति का एक अंग भी मानते हैं, लेकिन संरक्षण के समर्थन करने वाले लोगों का मानना है कि यदि अल्पसंख्यकों को सरकार द्वारा इस प्रकार से संरक्षण नहीं प्रदान किए जाने पर अल्पसंख्यकों को बहुसंख्यकों के मूल्य तथा मान्यताओं को वलात् झेलने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
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