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Maharashtra State BoardSSC (English Medium) 9th Standard

‘अपना व्यक्‍तित्‍व समृद्ध करने के लिए अलग-अलग भाषाओं का ज्ञान उपयुक्‍त होता है,’ इसपर अपने विचार लिखिए। - Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

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Question

‘अपना व्यक्‍तित्‍व समृद्ध करने के लिए अलग-अलग भाषाओं का ज्ञान उपयुक्‍त होता है,’ इसपर अपने विचार लिखिए।

Answer in Brief

Solution

दुनिया में असीमित ज्ञान अलग-अलग भाषाओं में बिखरा पड़ा है।  एक ही भाषा के द्वारा सारा ज्ञान सीख पाना संभव नहीं है। पूरे साहित्य का एक भाषा में अनुवाद भी संभव नहीं है। समस्त साहित्य का एक भाषा में अनुवाद प्राप्त करना भी असंभव है। अधिक से अधिक भाषाएँ सीखने से हमें न केवल साहित्यिक ज्ञान मिलता है बल्कि उस भाषा के समाज, समय, और सांस्कृतिक परिस्थितियों की भी गहरी समझ होती है। इससे हम उस भाषा के बोलने वाले समुदाय से जुड़ जाते हैं और हमारा व्यावहारिक दायरा भी बढ़ता है। महात्मा गांधी, आचार्य विनोबा भावे, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जैसे बहुभाषी महान व्यक्तियों का व्यक्तित्व इसी कारण समृद्ध था। इन विभूतियों ने भारत को एकजुट करने में भी बहुभाषी होने का लाभ उठाया। विभिन्न भाषाओं की समझ ने उन्हें अन्य भाषा बोलने वाले लोगों की समस्याओं को समझने और उनका समाधान करने में मदद की। इसलिए, भाषाओं का ज्ञान हमारे व्यक्तित्व को समृद्ध करने और हमारे ज्ञान को विस्तार देने में भी महत्वपूर्ण है।

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मेरे पिता जी
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Chapter 2.09: मेरे पिता जी (पूरक पठन) - पाठ्य प्रश्न [Page 74]

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Balbharati Hindi - Lokbharati 9 Standard Maharashtra State Board
Chapter 2.09 मेरे पिता जी (पूरक पठन)
पाठ्य प्रश्न | Q (२) | Page 74
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